कोरबा(ट्रैक सिटी)। बालको में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत एक अधिकारी को 30 लाख रुपए का लोन दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगी करने का मामला सामने आया है। आरोपियों ने बैंक का एजेंट बनकर पहले लोन स्वीकृत कराने का भरोसा दिलाया और इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट, फाइल चार्ज सहित अन्य शुल्क के नाम पर अलग-अलग किश्तों में करीब 8 लाख रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए। ठगी का एहसास होने के बाद पीड़ित ने बालकोनगर थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार बालको में पाथीवाड़ा चक्रधर असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं और कंपनी के जीटी हॉस्टल में रहते हैं। घरेलू जरूरत के लिए उन्हें करीब 30 लाख रुपए की आवश्यकता थी। इसके लिए उन्होंने आईडीएफसी बैंक के पोर्टल पर ऑनलाइन लोन के लिए आवेदन किया था। हालांकि, उनका आवेदन रिजेक्ट हो गया। आवेदन के दौरान उन्होंने बैंक पोर्टल पर अपनी आवश्यक व्यक्तिगत जानकारी भी दर्ज की थी।
आवेदन रिजेक्ट होने के कुछ समय बाद उनके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। कॉलर ने खुद को आईडीएफसी बैंक का एजेंट बताते हुए कहा कि वह 30 लाख रुपए का लोन स्वीकृत करा सकता है। इसके लिए पहले 30 हजार रुपए ऑनलाइन जमा करने की मांग की गई। आरोपियों ने यह भी भरोसा दिलाया कि भुगतान के बाद लोन का सेंशन लेटर उपलब्ध करा दिया जाएगा।
कॉलर के झांसे में आकर पाथीवाड़ा ने 13 से 18 अगस्त के बीच यूपीआई के माध्यम से करीब 30 हजार रुपए अलग-अलग भुगतान किए। इसके बाद आरोपियों ने उनके मोबाइल पर 30 लाख रुपए का कथित लोन सेंशन ऑर्डर भी भेज दिया। लेकिन इसके बावजूद लोन की राशि उनके खाते में नहीं पहुंची। जब उन्होंने आरोपियों से संपर्क किया तो उन्होंने लोन की प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट, फाइल चार्ज और अन्य शुल्क बकाया होने की बात कही।
आरोपियों ने इन शुल्कों के नाम पर अलग-अलग किश्तों में रकम की मांग शुरू कर दी। पाथीवाड़ा के अनुसार उन्होंने आरोपियों द्वारा बताए गए अलग-अलग खातों और यूपीआई नंबरों पर करीब 8 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद भी जब लोन की राशि नहीं मिली तो उन्हें संदेह हुआ और ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने अपने परिचितों से चर्चा करने के बाद बालकोनगर थाना पहुंचकर पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने कथित तौर पर अपना नाम प्रेम वर्मा और विकास शुक्ला बताया है। हालांकि, उनकी वास्तविक पहचान और पता अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर ऑनलाइन लेन-देन, मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल, व्हाट्सऐप चैट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित ने पुलिस को बैंक लेन-देन का विवरण और भुगतान से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात कही है।
पुलिस लगातार लोगों को ऑनलाइन लोन, बैंक अधिकारी और एजेंट बनकर होने वाली साइबर ठगी से सावधान रहने की अपील कर रही है। पुलिस का कहना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर लोन स्वीकृति, प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क के नाम पर ऑनलाइन भुगतान करने से पहले बैंक की अधिकृत शाखा अथवा आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। साइबर ठग अक्सर जरूरतमंद लोगों को आसान और तत्काल लोन दिलाने का लालच देकर उनके साथ ठगी करते हैं।

