कोरबा (ट्रैक सिटी)। वार्ड क्रमांक 32 (पूर्व में वार्ड 29) स्थित पोड़ीबहार की श्रम न्यायालय गली के रहवासियों ने नगर पालिक निगम कोरबा के आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र में वर्षों से लंबित सड़क, बिजली एवं अन्य मूलभूत समस्याओं के निराकरण की मांग की है। आवेदन राकेश कुमार सिंह एवं समस्त निवासियों की ओर से प्रस्तुत किया गया है।
ज्ञापन में बताया गया है कि श्रम न्यायालय गली में लोग पिछले लगभग 30 वर्षों से निवास कर रहे हैं और नियमित रूप से संपत्ति कर, शिक्षा कर, सफाई कर सहित निगम के सभी करों का भुगतान करते हैं। इसके बावजूद आज तक क्षेत्र में पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है। गली में कई स्थानों पर बिजली के जले और टूटे हुए केबल, लो-वोल्टेज की समस्या, सड़कों पर घरों के ड्रेनेज चैंबरों का निर्माण तथा अन्य बुनियादी समस्याएं बनी हुई हैं।
रहवासियों का आरोप है कि इन समस्याओं को लेकर पूर्व पार्षद, वर्तमान पार्षद, निगम अधिकारियों तथा सुशासन तिहार के दौरान संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को कई बार लिखित आवेदन देकर अवगत कराया गया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 और 2025 के सुशासन तिहार में भी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2025 की बरसात के दौरान क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट की स्थिति अत्यंत खराब थी। दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए स्थानीय निवासी संतोष सिंह ने स्वयं के खर्च पर कुछ खंभों में लाइट लगवाई तथा खराब लाइटों की मरम्मत करवाई, लेकिन निगम की ओर से कोई सहायता नहीं मिली।
रहवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि निगम के शिविर मुख्य मार्गों तक सीमित रहते हैं, जबकि उनके क्षेत्र में केवल कर वसूली के लिए ही शिविर लगाए जाते हैं। उनका कहना है कि जिन क्षेत्रों में हाल के वर्षों में बेजा कब्जे वाले लोग बसे हैं, वहां सड़क, बिजली और पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं, जबकि पुराने रहवासियों को आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
रहवासियों ने आयुक्त से मांग की है कि श्रम न्यायालय गली का स्वयं निरीक्षण कर समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण कराया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि जब तक क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक संपत्ति कर, सफाई कर, शिक्षा कर सहित अन्य निगम करों में 100 प्रतिशत छूट प्रदान की जाए।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे आगे जनहित में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

