NEWS

महिला पतंजलि योग समिति छत्तीसगढ़ के वर्चुअल ऑन लाइन प्रांतीय सह योग प्रशिक्षण शिविर में त्रिदोष और हमारी प्रकृति से सुस्वास्थ्य पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

 

पतंजलि योगपीठ के आजीवन सदस्य चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ.नागेन्द्र नारायण शर्मा ने बताया त्रिदोष अनुसार प्रकृति निर्धारण तथा प्रकृति अनुसार आहार-विहार से सुस्वास्थ्य पाने के उपाय ।

त्रिदोष को संतुलित रखकर रहा जा सकता है निरोगी-डॉ. नागेन्द्र शर्मा

प्रकृति अनुसार आहार-विहार न करना रोगोत्पत्ति का मूल कारण – डॉ.नागेंद्र शर्मा।

महिला पतंजलि योग समिति छत्तीसगढ़ द्वारा ऑन लाइन सह योग प्रशिक्षण शिविर में त्रिदोष अनुसार प्रकृति निर्धारण तथा प्रकृति अनुसार आहार-विहार से सुस्वास्थ्य पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमे पतंजलि योगपीठ हरिद्वार उत्तराखंड के आजीवन सदस्य, पतंजलि योगपीठ हरिद्वार से प्रशिक्षित सुप्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सा विशेषज्ञ नाड़ीवैद्य डॉ.नागेन्द्र नारायण शर्मा ने त्रिदोष (वात-पित्त-कफ) के आधार पर अपनी प्रकृति का निर्धारण कैसे करें इस विषय पर विस्तार से बताते हुये सभीको त्रिदोषों का संतुलन बनाये रखने के लिये अपनी प्रकृति अनुसार आहार-विहार करने को कहा। क्योंकि त्रिदोषों को संतुलित रखकर ही हम निरोगी रह पायेंगे। साथ ही उन्होंने प्रकृति अनुसार आहार-विहार न करने को रोगोत्पत्ति का मूल कारण बताया। इस वर्चुअल सह योग प्रशिक्षण कार्यक्रम में पतंजलि महिला योग समिति की छत्तीसगढ़ राज्य कार्यकारिणी सदस्या हेमलता साहू, कोरबा जिला प्रभारी एस लक्ष्मी मूर्ति, महासमुंद से पूनम पटले, ममता प्रधान, बलौदा बाजार से राजेश्वरी बघेल, खुमेश्वरी वर्मा, रायगढ़ से शर्मिला नायक, बिलासपुर से संतोषी यादव, रश्मि श्रीवास्तव, सोशल मीडिया प्रभारी कोरबा जिला विंद्रा चौहान एवं योग शिक्षिका आशा सोनी के अलावा प्रशिक्षार्थी सुनीता, जया, उपासना, स्वाति, मीनू, नम्रता, सीमा एवं हेमलता के अलावा पूरे छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में सह योग प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षण ले रही माताएं एवं बहने विशेष रूप से उपस्थित रही।

फ़ोटो- 1- महिला पतंजलि योग समिति छत्तीसगढ़ के ऑनलाइन सह योग प्रशिक्षण शिविर के वर्चुअल कार्यक्रम में त्रिदोष अनुसार प्रकृति निर्धारण तथा प्रकृति अनुसार आहार-विहार से सुस्वास्थ्य पाने के उपाय पर जागरूकता कार्यक्रम में व्याख्यान देते नाड़ीवैद्य डॉ.नागेन्द्र नारायण शर्मा एवं उपस्थित प्रशिक्षार्थी।

Editor in chief | Website |  + posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button