Raipur

कांग्रेस नेतृत्व को हार का ठीकरा फोड़ने के लिए जिला अध्यक्षों के अलावा कोई और नजर नहीं आ रहा : भाजपा

भाजपा रायपुर सम्भाग प्रभारी सिंह ने कहा : कांग्रेस जब तक खेल के नियम की बारीकियाँ समझकर खेलने के तरीके नहीं बदल देती, तब तक खिलाड़ी बदलने से सकारात्मक परिणाम नहीं आने वाला है

 

 

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के रायपुर सम्भाग प्रभारी और पूर्व विधायक सौरभ सिंह ने कहा है कि कांग्रेस के 11 जिला अध्यक्षों पर आखिरकार हार का ठीकरा फोड़ ही दिया गया। कांग्रेस का यही राजनीतिक चरित्र रहा है कि वहाँ जीत के सभी भागीदार होते हैं लेकिन हार का जिम्मा लेने का नैतिक साहस कोई नहीं दिखाता। श्री सिंह ने कहा कि कांग्रेस के बड़े नेता गॉडफादर की परिक्रमा और एक खानदान की चाटुकारिता के चलते सेफ गेम खेलकर कार्यकर्ताओं के पोलिटिकल करियर को दाँव पर लगाने में किस कदर माहिर हैं, यह कांग्रेस के 11 जिला अध्यक्षों के बदलाव से साफ हो चला है।

भाजपा रायपुर सम्भाग प्रभारी श्री सिंह ने कहा कि विधानसभा चुनाव से लेकर हाल ही हुए नगरीय निकाय व त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों तक कांग्रेस जिस राजनीतिक दुर्दशा को भोगने के लिए विवश हुई है, उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्यकर्ताओं ने पार्टी फोरम से लेकर कार्यकर्ता सम्मेलन तक खुले तौर पर नाम लेकर अपनी पीड़ा साझा की है। भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री रहते कांग्रेस सत्ता से उखाड़ फेंकी गई, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में विधानसभा, लोकसभा, रायपुर दक्षिण उपचुनाव, निकाय और पंचायत चुनाव में कांग्रेस की लगातार दुर्गति हुई है। बैज तो सांसद रहते हुए एक विधानसभा चुनाव तक नहीं जीत पाए! बघेल कार्यकर्ता सम्मेलन में मुँह पर खरी-खोटी सुनकर राजनांदगाँव लोकसभा सीट से हार गए, भूपेश सरकार के अनेक मंत्री विधानसभा के बाद लोकसभा चुनाव हार गए। इसके बाद भी अगर कांग्रेस नेतृत्व को हार का ठीकरा फोड़ने के लिए जिला अध्यक्षों के अलावा कोई और नजर नहीं आ रहा है तो कांग्रेस नेतृत्व को अपनी नजर का इलाज कराके नजरिए में बदलाव लाने की जरूरत है। श्री सिंह ने सवाल दागा कि कार्यकर्ताओं को स्लीपर सेल और सत्ता-सुख, सुविधाभोगी बताकर अपमानित करने वाले बड़े नेताओं की जिम्मेदारी कब तय होगी?

भाजपा रायपुर सम्भाग प्रभारी श्री सिंह ने कहा कि कांग्रेस जब तक खेल के नियम की बारीकियाँ समझकर खेलने के तरीके नहीं बदल देती, तब तक खिलाड़ी बदलने से सकारात्मक परिणाम नहीं आने वाला है। दरअसल दिक्कत यही है कि कांग्रेस अभी तक लोकतंत्र का मूल मतलब ही नहीं समझ पा रही है और राजतंत्र के समान एक परिवार की चाटुकारिता से उबर नहीं पा रही है। कांग्रेस जनता के हक के लिए लड़ने के बजाय उनके हक पर डाका मारने का काम नहीं छोड़ रही है। पहले एक बार, बार-बार असफल हो चुके खिलाड़ियों पर दोबारा दाँव लगा रही है और इसीलिए हार-पर-हार झेलना कांग्रेस की नियति हो गई है। श्री सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार जिस कांग्रेस की रग-रग में समाया हुआ है, जनता का हित और कल्याण जिसके एजेंडे में सिर्फ मुँहजुबानी जमाखर्च के अलावा और कोई अहमियत नहीं रखता, वह कांग्रेस कितना भी प्रयास कर ले, परंतु जनता का विश्वास हासिल नहीं कर पाएगी।

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