गरियाबंद

बंदियों के आयु सत्यापन के लिए जेल का किया गया निरीक्षण

किशोरों की पहचान व संरक्षण के लिए कार्रवाई की जाएगी

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गरियाबंद (ट्रैक सिटी)/ सर्वोच्च न्यायालय तथा बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली के निर्देशानुसार जेलों में निवासरत बंदियों का उम्र सत्यापन कराया जाएगा। उम्र निर्धारण के संबंध में संदेह अथवा प्रक्रियागत त्रुटि के कारण बच्चे जेलों में निरुद्ध हो जाते हैं। जिनके उम्र का सत्यापन करने के लिए अधिवक्ताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के पैनल को सम्मिलित कर जेलों का निरीक्षण प्रत्येक तीन माह में किया जाता है।

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जिसके तहत जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यक्रम अधिकारी श्री अशोक कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार तथा जिला बाल संरक्षण अधिकारी अनिल द्विवेदी के मार्गदर्शन में सोमवार 30 मार्च को दोपहर 12ः00 बजे जिला जेल गरियाबंद का निरीक्षण किया गया। इस इस दौरान किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य श्रीमती पूर्णिमा तिवारी, बाल कल्याण समिति के सदस्य श्रीमती ताकेश्वरी साहू, लोक आस्था की सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री लता नेताम, अधिवक्ता हेमराज दाउ, एवं विधिक सह परिवीक्षा अधिकारी शरदचंद निषाद द्वारा जेल निरीक्षण किया गया। निरीक्षण समिति द्वारा 05 बैरकों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण समिति द्वारा प्रत्येक बंदियों से मुलाकात कर उनके वास्तविक आयु की जानकारी ली गई।

जिसमें 180 बंदी निरूध्द पाया गया जबकि 10 बंदी अपने प्रकरण के अग्रिम कार्यवाही हेतु न्यायालय गये हुये थे। 03 बंदियो ने जेल निरीक्षण समिति को बताया कि हमारा उम्र 18 वर्ष से कम लग रहा है, जबकि 02 बंदियों ने बताया कि जेल में निरुद्ध रहने से उनके बालकों का घर में देखरेख एवं संरक्षण करने वाले वैध संरक्षण घर में कोई नहीं है। जेल निरीक्षण समिति द्वारा उक्त बंदियों के जन्मतिथि सत्यापन कराकर बालकों के प्रकरण में अग्रिम कार्यवाही करने का आश्वस्त किया। इस दौरान सहायक जेल अधीक्षक रवि भूआर्य भी उपस्थित थे।

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