आस्था, रहस्य और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम मां मड़वारानी धाम
कोरबा (ट्रैक सिटी)। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में कोरबा-चांपा मुख्य मार्ग पर स्थित मां मड़वारानी मंदिर श्रद्धा, आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रमुख केंद्र है। लगभग 2200 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजमान मां मड़वारानी दाई के दर्शन के लिए वर्षभर श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस धाम की विशेष पहचान यहां की प्राचीन लोकमान्यताओं और नवरात्रि की अनूठी परंपरा से है। मान्यता है कि यहां नवरात्रि की पूजा-अर्चना प्रतिपदा के बजाय पंचमी से प्रारंभ होती है, जो इस धाम को विशिष्ट पहचान देती है।
कल्पवृक्ष और माता के दर्शन से जुड़ी लोकमान्यताएं
मां मड़वारानी धाम से जुड़ी अनेक जनश्रुतियां पीढ़ियों से प्रचलित हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, कल्पवृक्ष के समीप जवा अपने आप उगने की घटना को माता की कृपा से जोड़कर देखा जाता है। क्षेत्र में प्रचलित लोककथाओं के अनुसार, पहाड़ के नीचे रहने वाले चरवाहों और किसानों को माता ने विभिन्न स्वरूपों में दर्शन दिए थे। जनश्रुति यह भी है कि माता सुंदर कन्या का रूप धारण कर शेर पर सवार होकर विचरण करती थीं।
प्राकृतिक सौंदर्य और रहस्यमयी स्थलों से घिरा धाम
मड़वारानी पहाड़ घने जंगलों, विशाल चट्टानों, प्राकृतिक गुफाओं और जलस्रोतों के लिए भी जाना जाता है। स्थानीय विवरणों में थिपापानी नामक स्थल का उल्लेख मिलता है, जहां बारहों महीने पानी के रिसाव की मान्यता है। श्रद्धालु इसे माता की कृपा से जोड़कर देखते हैं।
पहाड़ पर स्थित चीतामाड़ा, बड़े खेलिया और जालाद्वारी जैसे स्थानों के नामों के पीछे भी लोककथाएं प्रचलित हैं। जनश्रुति के अनुसार, चीतामाड़ा की गुफाओं में पुराने समय में चीते निवास करते थे। जंगल में शेर या बाघ के विचरण और पदचिह्नों से जुड़ी कथाएं भी स्थानीय लोगों की स्मृतियों में आज तक जीवित हैं।
प्राचीन मंदिर और तालाबों से जुड़ी जनश्रुतियां
मड़वारानी पहाड़ के आसपास बीरतराई और अन्य गांवों में प्राचीन देवस्थलों, तालाबों और मूर्तियों से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हैं। बड़कामुड़ा तालाब के निकट मंदिर निर्माण को लेकर जनश्रुति है कि रात में निर्माण के दौरान प्रकाश होने पर मंदिर ध्वस्त हो गया और उसके अवशेष आसपास बिखर गए।
इसी तरह अमृत कुंड के पानी से असाधारण शक्ति मिलने और पुरेनिया तालाब में माता द्वारा सोने-चांदी के गंगारों की रक्षा किए जाने की कथाएं भी क्षेत्र की लोकपरंपरा का हिस्सा हैं। ये जनश्रुतियां स्थानीय संस्कृति और धार्मिक आस्था को पीढ़ियों से आगे बढ़ाती रही हैं।
कोरबा और चांपा से पहुंचना आसान
मां मड़वारानी मंदिर कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर और चांपा जंक्शन से करीब 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बिलासपुर से इसकी दूरी लगभग 65 किलोमीटर बताई जाती है। कोरबा-चांपा मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण यहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। पहाड़ पर मंदिर तक जाने के लिए पक्के मार्ग और सीढ़ियों की व्यवस्था है।
कोरबा और चांपा से मड़वारानी के लिए बस सुविधा उपलब्ध है। रेल मार्ग से आने वाले श्रद्धालु चांपा जंक्शन से आगे स्थानीय ट्रेन के माध्यम से मड़वारानी रेलवे स्टेशन तक पहुंच सकते हैं। यहां से मंदिर जाने के लिए स्थानीय आवागमन के साधनों का उपयोग किया जा सकता है।
गांव-गांव में माता के प्रति अटूट श्रद्धा
मां मड़वारानी के प्रति लोगों की श्रद्धा पहाड़ पर स्थित मुख्य धाम तक ही सीमित नहीं है। खरहरी, मड़वारानी, बीरतराई, बरपाली, सरगबुंदिया और आसपास के अनेक गांवों में माता के मंदिर स्थापित हैं, जहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालु माता के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।
मां मड़वारानी धाम धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय लोकपरंपराओं का अनूठा संगम है। पहाड़ की चोटी पर विराजमान माता के प्रति श्रद्धालुओं का विश्वास आज भी कायम है और यह धाम कोरबा जिले की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

