कोरबा

अवैध कब्जों पर बुलडोजर, लेकिन जिम्मेदार अफसरों पर कब होगी कार्रवाई? नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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कोरबा (ट्रैक सिटी)। नगर पालिका निगम कोरबा द्वारा शहर में समय-समय पर अवैध अतिक्रमण और बेजा कब्जों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती है। बुलडोजर चलाए जाते हैं, ठेले-गुमटियां हटाई जाती हैं और वर्षों से व्यवसाय कर रहे लोगों को अचानक बेदखल कर दिया जाता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी शुरुआत में ही अवैध कब्जों को रोकने की थी, उनके खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती?
नगर निगम आयुक्त द्वारा शहर के प्रत्येक जोन और वार्ड की निगरानी के लिए प्रभारी अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इन अधिकारियों का दायित्व केवल विकास कार्यों की निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छता, पेयजल, विद्युत व्यवस्था तथा अवैध बेजा कब्जों पर भी लगातार नजर रखना उनकी जिम्मेदारी है। इसके बावजूद शहर के अधिकांश क्षेत्रों में अतिक्रमण धीरे-धीरे शुरू होता है और महीनों, बल्कि वर्षों तक बढ़ता रहता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब अवैध निर्माण या अतिक्रमण की शुरुआत होती है, तब संबंधित जोन प्रभारी और निगम अमला मौन बना रहता है। यदि उसी समय कार्रवाई कर दी जाए तो न तो अवैध कब्जा बढ़ेगा और न ही भविष्य में विवाद की स्थिति बनेगी। लेकिन लापरवाही के कारण अतिक्रमण स्थायी रूप ले लेता है और बाद में निगम जब उसे हटाने पहुंचता है तो लोगों का भारी विरोध झेलना पड़ता है।
हाल के दिनों में निगम की कई कार्रवाई के दौरान महिलाओं, छोटे व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों द्वारा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। लोगों का कहना है कि यदि निगम ने समय रहते नियमों का पालन कराया होता तो ऐसी नौबत ही नहीं आती। इससे यह भी सवाल खड़ा होता है कि क्या निगम की कार्रवाई केवल कमजोर वर्गों तक ही सीमित है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह जवाबदेही से बच जाते हैं?
शहरवासियों का मानना है कि यदि किसी क्षेत्र में वर्षों तक अवैध कब्जा बना रहता है तो इसकी जिम्मेदारी केवल कब्जाधारी की नहीं बल्कि संबंधित जोन प्रभारी, वार्ड प्रभारी और निगरानी करने वाले अधिकारियों की भी तय होनी चाहिए। आखिर उनकी नियुक्ति किस उद्देश्य से की गई है, यदि वे अपने क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण को रोक ही नहीं पा रहे हैं?
प्रशासनिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि जवाबदेही तय किए बिना अतिक्रमण की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। यदि हर जोन प्रभारी से उसके क्षेत्र में हुए अवैध कब्जों का जवाब मांगा जाए और लापरवाही साबित होने पर विभागीय कार्रवाई की जाए, तो भविष्य में अवैध अतिक्रमण की घटनाओं में काफी कमी आ सकती है।
अब शहरवासियों की मांग है कि निगम केवल बुलडोजर चलाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने का दावा न करे, बल्कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कठोर कार्रवाई करे जिनकी लापरवाही और उदासीनता के कारण अवैध कब्जे पनपते हैं। जब तक जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक अतिक्रमण हटाने के अभियान केवल दिखावटी कार्रवाई बनकर रह जाएंगे और हर बार निगम को जनता के विरोध का सामना करना पड़ेगा।

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