कोरबा (ट्रैक सिटी) कोरबा से चांपा तक प्रस्तावित सड़क मार्ग के किनारे लगातार हो रहे बेजा कब्जों ने भविष्य की यातायात व्यवस्था और विकास योजनाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मार्ग के दोनों ओर धीरे-धीेरे दुकानें, गुमटियां, अस्थायी निर्माण और निजी कब्जे बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं रोका गया, तो आने वाले समय में सड़क चौड़ीकरण और निर्माण कार्य में भारी दिक्कतें आएंगी। लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जब कब्जे की शुरुआत हो रही थी, तब संबंधित विभागों ने रोकथाम क्यों नहीं की।
कोरबा और आसपास के क्षेत्रों में पूर्व में भी सरकारी जमीनों पर कब्जे के बाद प्रशासन को बुलडोजर कार्रवाई करनी पड़ी है। हाल के वर्षों में कई जगहों पर अतिक्रमण हटाने अभियान चलाए गए, जहां सड़क और सार्वजनिक भूमि पर बने अवैध निर्माणों को हटाया गया।
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि प्रस्तावित मार्ग की सीमांकन प्रक्रिया जल्द पूरी कर कब्जाधारियों को नोटिस जारी किया जाए, ताकि भविष्य में करोड़ों की परियोजना विवादों में न फंसे।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सड़क परियोजना के प्रारंभिक चरण में ही भूमि संरक्षण और अतिक्रमण नियंत्रण आवश्यक होता है। अन्य शहरों में देरी के कारण सड़कें संकरी होने और न्यायालयी विवाद बढ़ने के मामले सामने आ चुके हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन समय रहते सक्रियता दिखाता है या फिर निर्माण शुरू होने के बाद बुलडोजर कार्रवाई ही अंतिम विकल्प बनेगी।
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