उद्योग मंत्री के जिले में शिक्षा विभाग का मुखिया ही स्थायी नहीं, मंगलवार के तबादले के बाद फिर उठे सवाल
कोरबा (ट्रैक सिटी)। जिला शिक्षा अधिकारियों के तबादले के बाद कोरबा की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कोरबा जैसे बड़े और महत्वपूर्ण जिले में करीब दो से ढाई वर्षों से जिला शिक्षा अधिकारी का पद प्रभारी व्यवस्था के भरोसे चल रहा है। मंगलवार को हुए प्रशासनिक फेरबदल ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है कि आखिर कोरबा को नियमित जिला शिक्षा अधिकारी कब मिलेगा?
प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक जिलों में शामिल कोरबा से प्रदेश के उद्योग मंत्री आते हैं। इसके बावजूद शिक्षा विभाग के इतने महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर लंबे समय से स्थायी नियुक्ति नहीं होना सामान्य प्रशासनिक स्थिति नहीं कही जा सकती। आखिर शासन और विभाग के उच्च अधिकारियों का ध्यान इस ओर क्यों नहीं गया?
नियमित नियुक्ति में अड़चन क्या है?
जिला शिक्षा अधिकारी जिले की स्कूली शिक्षा व्यवस्था का प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी होता है। स्कूलों की मॉनिटरिंग से लेकर शिक्षकों की पदस्थापना, पदोन्नति, विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक निर्णयों तक उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
ऐसे में सवाल यह है कि जब पद इतना महत्वपूर्ण है तो इसे वर्षों तक प्रभारी अधिकारी के भरोसे क्यों रखा गया? क्या विभाग में नियमित अधिकारी उपलब्ध नहीं है, नियुक्ति प्रक्रिया में कोई अड़चन है या फिर प्रभारी व्यवस्था को ही सुविधाजनक मान लिया गया है?
प्रभारी कार्यप्रणाली पर सवाल, फिर भी व्यवस्था कायम
बीते वर्षों में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर भी अलग-अलग मौकों पर सवाल उठते रहे हैं। विभागीय कामकाज और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर आपत्तियां सामने आने के बावजूद प्रभारी व्यवस्था का लंबे समय तक जारी रहना अब अपने आप में चर्चा का विषय है।
सवाल केवल अधिकारी के बने रहने का नहीं, बल्कि उस प्रशासनिक व्यवस्था की जवाबदेही का है, जिसने इतने लंबे समय तक नियमित नियुक्ति की जरूरत को नजरअंदाज किया।
अब सवाल जवाबदेही का
कोरबा में शिक्षा विभाग की यह स्थिति केवल पदस्थापना का मामला नहीं है। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक प्राथमिकता और जवाबदेही से जुड़ा सवाल है। यदि नियमित DEO की नियुक्ति संभव नहीं थी तो इसकी वजह क्या थी? और यदि कोई बाधा नहीं थी तो नियुक्ति क्यों नहीं की गई?
अब विभाग को स्पष्ट करना होगा कि कोरबा को नियमित जिला शिक्षा अधिकारी देने में देरी की वजह क्या है और यह व्यवस्था कब तक समाप्त होगी?
जिम्मेदारी किसकी?
▪ शासन: महत्वपूर्ण जिले में नियमित DEO की नियुक्ति क्यों नहीं हुई?
▪ स्कूल शिक्षा विभाग: ढाई साल से प्रभारी व्यवस्था जारी रहने की वजह क्या है?
▪ उच्च प्रशासनिक अधिकारी: क्या लंबे समय से चली आ रही इस व्यवस्था की समीक्षा की गई?
▪ जिला प्रशासन: शिक्षा विभाग के महत्वपूर्ण पद पर स्थायी प्रशासनिक नेतृत्व को लेकर क्या पहल की गई?
▪ जनप्रतिनिधि: उद्योग मंत्री के गृह जिले में शिक्षा विभाग की इस स्थिति पर अब तक प्रभावी पहल क्यों नहीं हुई?
सबसे बड़ा सवाल
कोरबा को नियमित जिला शिक्षा अधिकारी देने के लिए आखिर किसका इंतजार किया जा रहा है?
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