राष्ट्रीय खेल दिवस पर एक ओर प्रतिभाओं का सम्मान, दूसरी ओर कोरबा के प्रमुख खेल परिसर की बदहाली सवालों के घेरे में
नगर निगम, खेल विभाग, बालको और खेल अकादमी के संचालकों से जवाब मांगती तस्वीर
कोरबा (ट्रैक सिटी)। एक ओर आज राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ियों को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कोरबा का प्रमुख प्रियदर्शिनी इंदिरा स्टेडियम खिलाड़ियों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। एक तरफ सरकार खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने तथा उन्हें संसाधनों और अवसरों की कमी न होने देने की बात कर रही है, तो दूसरी ओर शहर के प्रमुख खेल मैदान में ही सुविधाओं का अभाव व्यवस्था की हकीकत पर सवाल खड़ा कर रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने समारोह में खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान में खिलाड़ी का परिश्रम, अनुशासन और संघर्ष केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी सफलता से पूरे प्रदेश और देश का गौरव बढ़ता है। छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण पीछे न रहना पड़े।
इधर इंदिरा स्टेडियम में जरूरी सुविधाओं का टोटा
मुख्यमंत्री की इस मंशा के बीच कोरबा के इंदिरा स्टेडियम की तस्वीर एक अलग ही कहानी बयां कर रही है। स्टेडियम में मैदान के कुछ हिस्सों में कमजोर रोशनी है, जबकि कई हिस्से शाम होते ही अंधेरे में डूब जाते हैं। ऐसे में खिलाड़ियों के लिए नियमित अभ्यास करना मुश्किल हो जाता है।
स्टेडियम की साफ-सफाई, मैदान का रखरखाव, घास की कटाई, प्रकाश व्यवस्था सहित कई बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ट्रैक सिटी ने भी पूर्व में स्टेडियम की बदहाली और रखरखाव से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया था, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है।
1996 में हुआ था लोकार्पण, आज रखरखाव को तरस रहा परिसर
स्टेडियम परिसर में लगा शिलालेख इसके गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है। शिलालेख के अनुसार विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण, कोरबा द्वारा प्रियदर्शिनी इंदिरा खेल परिसर का लोकार्पण 27 अक्टूबर 1996 को किया गया था। उस समय खेल सुविधाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किया गया यह परिसर आज लगभग तीन दशक बाद अपने नियमित रखरखाव को लेकर सवालों के घेरे में है।
शिलालेख पर तत्कालीन मुख्यमंत्री, मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के नाम दर्ज हैं। लेकिन सवाल यह है कि जिस खेल परिसर को आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए तैयार किया गया था, उसकी मौजूदा स्थिति को सुधारने के लिए जिम्मेदार विभाग आखिर कब गंभीरता दिखाएंगे?
नगर निगम से लेकर खेल विभाग तक जिम्मेदारी किसकी?
स्टेडियम की बदहाली को लेकर सबसे बड़ा सवाल नगर पालिका निगम कोरबा की भूमिका पर उठता है। यदि स्टेडियम परिसर के रखरखाव की जिम्मेदारी निगम की है, तो नियमित साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, मैदान और आसपास के हिस्सों की निगरानी क्यों नहीं हो रही? यदि जिम्मेदारी किसी अन्य विभाग की है, तो निगम और संबंधित विभाग के बीच समन्वय क्यों नहीं दिखाई देता?
इसी तरह खेल एवं युवा कल्याण विभाग से भी सवाल है कि शहर के प्रमुख खेल परिसर की वास्तविक स्थिति का नियमित निरीक्षण कब किया गया? खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या कार्ययोजना बनाई गई और उस पर कितना अमल हुआ?
बालको और खेल अकादमी की भूमिका पर भी सवाल
कोरबा में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने में उद्योगों और निजी संस्थानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में वेदांता समूह की कंपनी बालको से भी यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि शहर के खिलाड़ियों को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उसकी ओर से क्या प्रयास किए जा रहे हैं। यदि कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत खेलों को प्रोत्साहन दिया जाता है, तो क्या शहर के इस प्रमुख खेल परिसर के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए कोई पहल की जा सकती है?
वहीं खेल अकादमी के संचालकों से भी सवाल है कि जिस परिसर में खिलाड़ी अभ्यास करते हैं, वहां उनकी मूलभूत जरूरतों को लेकर क्या पहल की जा रही है। खिलाड़ियों को केवल प्रशिक्षण देने से प्रतिभा निखर नहीं सकती, उन्हें सुरक्षित, स्वच्छ और पर्याप्त सुविधाओं वाला मैदान भी चाहिए।
सम्मान के साथ संसाधन भी जरूरी
राष्ट्रीय खेल दिवस पर खिलाड़ियों का सम्मान निश्चित रूप से प्रेरणादायक है। लेकिन प्रतिभावान खिलाड़ियों को मंच पर सम्मानित करने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर खेल सुविधाओं को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है। यदि किसी खिलाड़ी में प्रतिभा है, लेकिन उसे अभ्यास के लिए पर्याप्त रोशनी वाला मैदान, सुरक्षित परिसर, बेहतर ट्रैक, साफ मैदान और अन्य जरूरी सुविधाएं नहीं मिलतीं, तो उसकी प्रतिभा प्रभावित होना स्वाभाविक है।
मुख्यमंत्री की यह बात कि “प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण पीछे नहीं रहना पड़े” कोरबा के इंदिरा स्टेडियम के संदर्भ में विशेष महत्व रखती है।
जिम्मेदारों से सीधे सवाल
नगर पालिका निगम कोरबा से:
स्टेडियम के रखरखाव की वर्तमान जिम्मेदारी किसकी है?
खराब और कमजोर प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए क्या कार्रवाई हुई?
मैदान और परिसर की नियमित साफ-सफाई व घास कटाई की व्यवस्था क्या है?
खेल एवं युवा कल्याण विभाग से:
स्टेडियम का अंतिम बार निरीक्षण कब किया गया?
खिलाड़ियों की सुविधाओं के लिए कितनी राशि स्वीकृत और खर्च की गई?
स्टेडियम के उन्नयन की कोई नई कार्ययोजना प्रस्तावित है या नहीं?
बालको प्रबंधन से:
CSR के तहत खेलों और खिलाड़ियों के लिए अब तक क्या कार्य किए गए?
इंदिरा स्टेडियम की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने में सहयोग की कोई योजना है?
खेल अकादमी के संचालकों से:
खिलाड़ियों की सुविधाओं और सुरक्षा को लेकर क्या व्यवस्था है?
प्रकाश, मैदान और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए क्या पहल की गई?
एक ओर मुख्यमंत्री खिलाड़ियों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच पर आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं, वहीं कोरबा के खिलाड़ी अपने ही शहर के प्रमुख स्टेडियम में पर्याप्त सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। अब देखना यह है कि सम्मान और घोषणाओं से आगे बढ़कर जिम्मेदार संस्थाएं मैदान की वास्तविक स्थिति बदलने के लिए कब कदम उठाती हैं।

