कोरबा

शौचालय बना, मरम्मत हुई… फिर भी सुविधा बदहाल!

इतवारी बाजार के सार्वजनिक शौचालय में समय से पहले ताला, गंदगी और कबाड़ का अंबार; नल भी गायब

कोरबा (ट्रैक सिटी)। नगर पालिका निगम कोरबा द्वारा स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत आम लोगों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इतवारी बाजार में सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया है। लंबे समय तक बंद रहने के बाद आवश्यक मरम्मत के पश्चात इसे लोगों के लिए दोबारा खोला गया, लेकिन अब इसके संचालन और रखरखाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों और बाजार में सब्जी विक्रय करने वाले लोगों के अनुसार शौचालय प्रतिदिन शाम करीब 4 बजे से पहले ही बंद कर दिया जाता है। इससे बाजार में आने वाले लोगों, दुकानदारों और सब्जी विक्रेताओं को परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक शौचालय का उद्देश्य ही यह है कि नागरिकों को शौच आदि के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े, लेकिन समय से पहले ताला लगने के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
सफाई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में
स्थानीय लोगों का कहना है कि शौचालय में साफ-सफाई का भी अभाव नजर आता है। जिम्मेदार कर्मचारियों की तैनाती के बावजूद परिसर की नियमित सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। शौचालय परिसर में कबाड़ भरा रहने की शिकायत भी सामने आई है। वहीं, लोगों के लिए पानी की सुविधा उपलब्ध कराने वाले कई नल गायब हैं, जिससे शौचालय की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
लोगों का कहना है कि जब सार्वजनिक शौचालय में कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय है, तो फिर सफाई, पानी और परिसर के रखरखाव की स्थिति ऐसी क्यों बनी हुई है? यदि शौचालय में कबाड़ जमा है और आवश्यक नल तक उपलब्ध नहीं हैं, तो नियमित निरीक्षण और निगरानी की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कर्मचारियों के व्यवहार की भी शिकायत
स्थानीय लोगों ने शौचालय में कार्यरत महिला एवं पुरुष कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी शिकायत की है। उनका आरोप है कि आने वाले लोगों के साथ कई बार अभद्र व्यवहार किया जाता है। लोगों के अनुसार इस संबंध में जनप्रतिनिधियों से भी शिकायत की गई और कर्मचारियों को समझाइश दी गई, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
लाखों की लागत, फिर भी सुविधा अधूरी
शासन की स्वच्छ भारत मिशन 2.0 जैसी योजना का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों को स्वच्छ और सुलभ शौचालय की सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में निर्माण और मरम्मत पर राशि खर्च होने के बाद यदि शौचालय समय से पहले बंद हो, सफाई व्यवस्था कमजोर हो, कबाड़ जमा रहे और पानी के नल तक गायब हों, तो इसकी उपयोगिता और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों ने नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों से मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच, शौचालय के निर्धारित संचालन समय का पालन, नियमित साफ-सफाई, पानी की व्यवस्था और कर्मचारियों के व्यवहार की निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने की मांग उठ रही है कि शौचालय से नल गायब होने और परिसर में कबाड़ जमा होने की स्थिति के लिए जिम्मेदारी किसकी है।

6-7 माह से पारिश्रमिक नहीं मिलने का दावा
शौचालय में कार्यरत कर्मचारियों से पूछताछ करने पर उन्होंने कथित तौर पर बताया कि उन्हें पिछले 6-7 माह से पारिश्रमिक का भुगतान नहीं मिला है। यदि कर्मचारियों का यह दावा सही है, तो यह भी जांच का विषय है कि उनके पारिश्रमिक का भुगतान किस एजेंसी अथवा ठेकेदार के माध्यम से होना है और भुगतान में इतनी लंबी देरी क्यों हुई।
ऐसे में नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को कर्मचारियों के लंबित पारिश्रमिक, भुगतान की प्रक्रिया और संबंधित एजेंसी/ठेकेदार के रिकॉर्ड की जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही कर्मचारियों को समय पर पारिश्रमिक मिल रहा है या नहीं, इसकी भी निगरानी आवश्यक है।

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