बैज बोले—शिक्षा के मंदिर को राजनीतिक प्रचार का केंद्र न बनाएं, भाजपा का पलटवार—कांग्रेस अपनी कुंठा बच्चों के कंधे पर न ढोए
रायपुर/कोरबा (ट्रैक सिटी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में राष्ट्र और समाज सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ को लेकर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। कांग्रेस ने जहां अभियान के तहत स्कूलों में आयोजित गतिविधियों को लेकर सरकार पर राजनीतिक प्रचार के लिए सरकारी मशीनरी और बच्चों के इस्तेमाल का आरोप लगाया है, वहीं भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक कुंठा बताते हुए पलटवार किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि ‘सेवा संकल्प अभियान’ के नाम पर स्कूल शिक्षा विभाग, जिला शिक्षा अधिकारियों और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों द्वारा जारी निर्देश शिक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी प्रशासनिक नाकामी और केंद्र सरकार के कथित दावों को छिपाने के लिए स्कूली बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों को राजनीतिक प्रचार में झोंक रही है।
बैज ने सवाल उठाया कि क्या अब स्कूलों का इस्तेमाल पढ़ाई के बजाय राजनीतिक प्रचार के लिए किया जाएगा? शिक्षकों की जिम्मेदारी बच्चों को पढ़ाना है या राजनीतिक आयोजनों के लिए भीड़ जुटाना? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बच्चों और अभिभावकों पर राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होने का दबाव बनाना कितना उचित है।
कांग्रेस ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर दावे भी किए हैं। पार्टी का आरोप है कि प्रदेश में शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या बड़ी है तथा स्कूल भवन, शौचालय, छात्रवृत्ति, किताब-कॉपी और गणवेश जैसी बुनियादी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। बैज ने सरकार से शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, फीस वृद्धि, बेरोजगारी और छात्रवृत्ति के बकाये पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की।
भाजपा ने पूछा—अपने गिरेबां में क्यों नहीं झांकते?
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि रचनात्मक और प्रेरणादायी कार्यक्रमों को राजनीतिक रंग देना कांग्रेस की ‘कुंठित मानसिकता’ का परिचायक है। भाजपा के अनुसार ‘सेवा संकल्प’ के तहत बच्चों के बौद्धिक, नैतिक और वैचारिक विकास से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
डॉ. मिश्रा ने दीपक बैज के पुराने आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि जून 2024 में ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर बैज खुद स्कूली बच्चों को लेकर भीषण गर्मी में सड़क पर आंदोलन कर रहे थे। भाजपा ने इसे बच्चों को राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करने का उदाहरण बताया।
भाजपा प्रवक्ता ने सवाल किया कि जब कांग्रेस शासनकाल में स्कूलों में छात्र-छात्राओं के बौद्धिक, सांस्कृतिक और वैचारिक विकास के लिए गतिविधियां आयोजित होती थीं, तब उन्हें राजनीति क्यों नहीं कहा गया? उनका कहना है कि बच्चों को सेवा भाव, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों से परिचित कराने वाली गतिविधियों का विरोध उचित नहीं है।
आरोपों के बीच असली सवाल बच्चों की पढ़ाई का
दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच मूल सवाल यह है कि स्कूलों में आयोजित ‘सेवा संकल्प’ की गतिविधियां विद्यार्थियों के शैक्षणिक हित और व्यक्तित्व विकास तक सीमित हैं या इनमें राजनीतिक प्रचार का स्वरूप भी शामिल है?
कांग्रेस जहां सरकारी स्कूलों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने की मांग कर रही है, वहीं भाजपा इसे बच्चों के समग्र विकास से जुड़ा रचनात्मक अभियान बता रही है। अब निगाह इस बात पर है कि शिक्षा विभाग के निर्देशों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की भागीदारी की प्रकृति क्या है और इन गतिविधियों का वास्तविक स्वरूप क्या रखा गया है।

