बलरामपुर

हर नागरिक बन सकता है जीवनरक्षक: ‘राह-वीर योजना’ में मदद करने वालों को सम्मान, सुरक्षा और पुरस्कार

बलरामपुर/कोरबा (ट्रैक सिटी) सड़क दुर्घटना में घायलों की जान बचाने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा ‘राह-वीर योजना’ संचालित की जा रही है, जिसे पूर्व में ‘गुड समेरिटन योजना’ के नाम से जाना जाता था। इसके तहत गंभीर सड़क दुर्घटना के घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को ‘राह-वीर’ के रूप में प्रति दुर्घटना 25,000 रूपये का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने जिलेवासियों से राह-वीर बनने की अपील करते हुए कहा कि दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा, जिसे ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है, घायल के जीवन के लिए सबसे निर्णायक होता है। इस दौरान उपचार मिल जाए तो अधिकांश जिंदगियां बचाई जा सकती हैं, किंतु कई बार लोग पुलिस पूछताछ या कानूनी उलझनों की आशंका से मदद करने से कतराते हैं और यही देरी घातक सिद्ध होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घायल की सहायता करने वाले व्यक्ति को कानूनी संरक्षण प्राप्त है, इसलिए किसी भी प्रकार के भय के बिना आगे आएं। कलेक्टर ने कहा कि दुर्घटनास्थल पर तमाशबीन बनने के बजाय संवेदनशील नागरिक की भूमिका निभाना ही सच्ची मानवता है, और हर व्यक्ति की छोटी-सी पहल किसी परिवार का सहारा बचा सकती है।
योजना में देशभर के शीर्ष 10 सर्वश्रेष्ठ राह-वीरों को 1 लाख रूपये की राशि, ट्रॉफी एवं प्रमाण-पत्र देकर राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया जाएगा, जिसका समारोह राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के दौरान नई दिल्ली में आयोजित होगा। मददगार को पुलिस पूछताछ, कानूनी झंझट और अनावश्यक परेशानी से सुरक्षा दी गई है तथा एक व्यक्ति वर्ष में अधिकतम पांच बार पुरस्कार का लाभ ले सकता है।
पात्रता के लिए घायल को दुर्घटना के एक घंटे के भीतर नजदीकी अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर पहुंचाना आवश्यक है। योजना उन गंभीर दुर्घटनाओं पर लागू होगी, जिनमें घायल को गंभीर चोट आई हो, सर्जरी करनी पड़ी हो या कम से कम तीन दिन अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा हो। सहायता स्वेच्छा से और बिना किसी इनाम की अपेक्षा के की गई होनी चाहिए, जबकि मददगार की पहचान आधार कार्ड अथवा आधार प्रमाणीकरण से सुनिश्चित की जाएगी।
प्रक्रिया के अनुसार पुलिस अथवा अस्पताल द्वारा राह-वीर का विवरण दर्ज किए जाने के बाद पुलिस अधिकारिक स्वीकृति जारी करती है। प्रस्ताव जिला स्तरीय मूल्यांकन समिति को भेजा जाता है, जो मासिक बैठक में समीक्षा कर स्वीकृति देती है। स्वीकृत सूची राज्य परिवहन विभाग को भेजी जाती है, जहां से पीएफएमएस के माध्यम से राशि सीधे राह-वीर के बैंक खाते में ऑनलाइन अंतरित होती है, और बाद में भारत सरकार राज्य को इसकी प्रतिपूर्ति करती है। एक ही दुर्घटना में एक से अधिक राह-वीर होने पर पुरस्कार राशि समान रूप से बांटी जाएगी। राह-वीर की व्यक्तिगत जानकारी केवल पुरस्कार प्रक्रिया के लिए उनकी सहमति से ही उपयोग की जाएगी।
योजना का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड या आधार प्रमाणीकरण, बैंक पासबुक की प्रति, मोबाइल नंबर, पुलिस द्वारा जारी स्वीकृति पत्र तथा अन्य आवश्यक विवरण प्रस्तुत करने होंगे। अधिक जानकारी हेतु नागरिक नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क कर सकते हैं अथवा राज्य परिवहन विभाग की वेबसाइट देख सकते हैं। दुर्घटना की स्थिति में तत्काल सहायता के लिए आपातकालीन सेवा 112 पर कॉल करें।

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