रायपुर

20 साल बाद बूढ़े और अंधे ‘छोटू’ को जंगल में छोड़ने की तैयारी

रायपुर (ट्रैक सिटी)। राजकीय पशु वन भैंसा के संरक्षण के नाम पर वन विभाग एक बार फिर बड़े प्रयोग की तैयारी में है। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले 20 वर्षों से बाड़े में कैद, बूढ़े और अंधे हो चुके छोटू भैंसा को वन विभाग असम से लाया है। अब इसे तीन मादाओं के साथ जंगल में छोड़ने का मोड ऑफ ऑपरेशन तैयार किया जा रहा है।

12 जनवरी 2026 की बैठक के बाद यह प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा गया था। वर्ष 2002 में जन्मे छोटू की उम्र अब 25 साल हो चुकी है। 2023 की वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक, छोटू का पिछला मैटिंग प्रयास असफल रहा था।

रेडियो कॉलर लगाकर सॉफ्ट रिलीज करने की योजना

अब उसे रेडियो कॉलर लगाकर सॉफ्ट रिलीज करने की योजना है, ताकि वह असम की वन भैंसा मादाओं के साथ वंश वृद्धि कर सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अंधा होने के कारण छोटू जंगल में स्वतंत्र रूप से विचरण नहीं कर पाएगा और भोजन के लिए बाड़े के इर्द-गिर्द ही भटकता रहेगा।

प्रयोगशाला बना अभयारण्य

वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 2006 से अब तक वन विभाग ने क्लोनिंग, हाइब्रिड ब्रीडिंग और वीर्य निकालने जैसे कई महंगे प्रयोग किए, जो विफल रहे। अब उम्र के अंतिम पड़ाव पर छोटू को दांव पर लगाना राजकीय पशु की सुरक्षा से खिलवाड़ है।

2030 तक हर साल 10 वन भैंसे असम से लाए जाएंगे

विभाग की योजना है कि 2030 तक हर साल 10 वन भैंसे असम से लाए जाएंगे, लेकिन बारनवापारा के बाड़े में बरसों से कैद अन्य भैंसों के भविष्य का प्रस्ताव अब भी मौन है।

Editor in chief | Website |  + posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button