रायपुर

मुख्यमंत्री गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 5 करोड़ 99 लाख रूपए का करेंगे भुगतान

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गौठानों में अब तक 1 लाख 5 हजार 180 लीटर गौमूत्र क्रय

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 ब्रम्हास्त्र और जीवामृत की बिक्री से 19.63 लाख की आय

गौठानों को किसानों ने अब तक 5 लाख 13 हजार क्विंटल पैरादान किया

रायपुर/ट्रैक सिटी न्यूज़। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 19 दिसम्बर को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गोधन न्याय योजना के राशि अंतरण के लिए आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से पशुपालक ग्रामीणों, गौठानों से जुड़ी महिला समूहों और गौठान समितियों को 5 करोड़ 99 लाख रूपए की राशि ऑनलाइन जारी करेंगे, जिसमें 1 दिसम्बर से 15 दिसम्बर तक गौठानों में पशुपालक ग्रामीणों, किसानों, भूमिहीनों से क्रय 2.2 लाख क्विंटल गोबर के एवज में 4 करोड़ 41 लाख रूपए, गौठान समितियों को 94 लाख और महिला समूहों को 64 लाख रूपए की लाभांश राशि शामिल हैं।

गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को 380.27 करोड़ का भुगतान

गोधन न्याय योजना के तहत राज्य में हितग्राहियों को 374 करोड़ 28 लाख रूपए का भुगतान किया जा चुका है, जिसमें 18 करोड़ रूपए की बोनस राशि भी शामिल है। 19 दिसम्बर को 5.99 करोड़ के भुगतान के बाद यह आंकड़ा 380 करोड़ 27 लाख रूपए हो जाएगा।

गोधन न्याय योजना के तहत छत्तीसगढ़ के गौठानों में 2 रूपए किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। गौठानों में 15 दिसम्बर तक 94.23 लाख क्विंटल गोबर खरीदी के एवज में गोबर विक्रेताओं को 188.45 करोड़ रूपए का भुगतान भी किया जा चुका है। 19 दिसम्बर को गोबर विक्रेताओं को 4.41 करोड़ रूपए का भुगतान होने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 192.96 करोड़ रूपए हो जाएगा।

 गौठान समितियों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को 167.83 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है। गौठान समितियों तथा स्व-सहायता समूह को 19 दिसम्बर को 1.58 करोड़ रूपए के भुगतान के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 169.41करोड़ रूपए हो जाएगा।

गौठानों में 1 लाख 5 हजार 180 लीटर गोमूत्र की खरीदी

19.63 लाख रूपए का बिक चुका ब्रम्हास्त्र और जीवामृत

राज्य के गौठानों में 4 रूपए लीटर की दर से गोमूत्र की खरीदी की जा रही है। गौठानों में अब तक एक लाख 5 हजार 180 लीटर गौमूत्र क्रय किया जा चुका है। इससे गौठानों में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा 36,913 लीटर कीट नियंत्रक ब्रम्हास्त्र और 19,765 लीटर वृद्धिवर्धक जीवामृत तैयार किया गया है। ब्रम्हास्त्र और जीवामृत की बिक्री से कब तक कुल 19 लाख 63 हजार 235 रूपए की आय हुई है।

गोबर से 25.87 लाख कम्पोस्ट खाद का उत्पादन-समूहों को 86 करोड़ 96 लाख की आय

गौठानों में महिला समूहों द्वारा 20.27 लाख क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तथा 5.40 लाख क्विंटल से अधिक सुपर कम्पोस्ट एवं 18,924 क्विंटल सुपर कम्पोस्ट प्लस खाद का निर्माण किया जा चुका है, जिसे सोसायटियों के माध्यम से क्रमशः 10 रूपए, 6 रूपए तथा 6.50 रूपए प्रतिकिलो की दर पर विक्रय किया जा रहा है। महिला समूह गोबर से खाद के अलावा गो-कास्ट, दीया, अगरबत्ती, मूर्तियां एवं अन्य सामग्री का निर्माण एवं विक्रय कर लाभ अर्जित कर रही हैं। गौठानों में महिला समूहों द्वारा इसके अलावा सब्जी एवं मशरूम का उत्पादन, मुर्गी, बकरी, मछली पालन एवं पशुपालन के साथ-साथ अन्य आय मूलक विभिन्न गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे महिला समूहों को अब तक 86 करोड़ 96 लाख रूपए की आय हो चुकी हैं। राज्य में गौठानों से 11,187 महिला स्व-सहायता समूह सीधे जुड़े हैं, जिनकी सदस्य संख्या 83,874 है। गौठानों में क्रय गोबर से विद्युत एवं प्राकृतिक पेंट सहित अन्य सामग्री का भी उत्पादन किया जा रहा है।

गोधन न्याय से 3 लाख 9 हजार से अधिक ग्रामीण पशुपालक लाभान्वित

राज्य में गोधन के संरक्षण और संर्वधन के लिए गांवों में गौठानों का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है। गौठानों में पशुधन देख-रेख, उपचार एवं चारे-पानी का निःशुल्क प्रबंध है। राज्य में अब तक 11,288 गांवों में गौठानों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिसमें से 9631 गौठान निर्मित एवं शेष गौठान निर्माणाधीन है। गोधन न्याय योजना से 3 लाख 9 हजार 806 ग्रामीण, पशुपालक किसान लाभान्वित हो रहे हैं।

गौठानों के लिए पैरादान का सिलसिला जारी

गौठानों में 5.13 लाख क्विंटल धानपैरा एकत्र

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अपील पर राज्य के किसानों द्वारा अपने गांवों के गौठानों को पैरादान किए जाने का सिलसिल अनवरत रूप से जारी है। राज्य के किसान भाई पैरा को खेतों में जलाने के बजाय उसे गौमाता के चारे के प्रबंध के लिए गौठान समितियों को दे रहे हैं। ऐसे किसान भाई जिनके पास पैरा परिवहन के लिए ट्रेक्टर या अन्य साधन उपलब्ध है, वह स्वयं धान कटाई के बाद पैरा गौठानों में पहुंचाकर इस पुनीत कार्य में सहभागिता निभा रहे हैं। गौठान समितियों द्वारा भी किसानों से दान में मिले पैरा का एकत्रीकरण कराकर गौठानों में लाया जा रहा है। गौठानों में अब तक 5 लाख 13 हजार क्विंटलपैरा गौमाता के चारे के लिए उपलब्ध है।

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