कोरबा

कचरे से भरे ट्रैक्टर पर महिलाओं के बैठने का मामला, ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग तेज

 

एक साल में तीन बार नोटिस, 30 हजार रुपये जुर्माने की वसूली; अब सीएसबी और ठेकेदार को फिर नोटिस, निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

कोरबा (ट्रैक सिटी)। कचरे से भरे ट्रैक्टर पर दो महिलाओं के बैठे होने की तस्वीर सामने आने के बाद नगर पालिक निगम कोरबा की स्वच्छता व्यवस्था और ठेकेदारों की जवाबदेही को लेकर सवाल उठने लगे हैं। समाचार पत्रों और न्यूज पोर्टलों में खबर प्रकाशित होने के बाद निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने मामले का संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय दिवारी को जांच के निर्देश दिए। आयुक्त के अनुसार, संबंधित ट्रैक्टर सीएसबी के माध्यम से ठेकेदार रशीद खान का है। ट्रैक्टर पर बैठी दोनों महिलाएं स्वच्छता दीदी नहीं, बल्कि ठेकेदार द्वारा नियोजित महिला कर्मचारी थीं। मामले में संबंधित cseb और ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया है।

 

इस प्रकरण में एक अहम जानकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय दिवारी ने मोबाइल पर चर्चा के दौरान दी। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष के भीतर संबंधित ठेकेदार को तीन बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं और उनसे कुल 30 हजार रुपये जुर्माने की राशि भी वसूल की गई है। ऐसे में मौजूदा मामला सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि बार-बार नोटिस और जुर्माने के बावजूद यदि लापरवाही से जुड़ी शिकायतें सामने आती हैं, तो व्यवस्था में सुधार के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।

जांच के बाद तय होगी कार्रवाई

कचरे से भरे ट्रैक्टर पर महिलाओं के बैठे होने की तस्वीर ने कर्मचारियों की सुरक्षा और कामकाज की परिस्थितियों को लेकर चिंता पैदा की है। हालांकि, तस्वीर के आधार पर घटना की पूरी परिस्थितियों के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि ट्रैक्टर का इस्तेमाल किस कार्य के लिए किया जा रहा था, महिलाएं किन परिस्थितियों में उस पर बैठी थीं और क्या संबंधित व्यवस्था निर्धारित नियमों के अनुरूप थी।

आशुतोष पाण्डेय, आयुक्त नगर पालिक निगम कोरबा

निगम प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अब उनके जवाब और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी। नोटिस जारी होना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है, इसे संबंधित पक्ष की गलती प्रमाणित होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जांच में यदि किसी नियम या अनुबंध की शर्त का उल्लंघन सामने आता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

इसके साथ ही पूर्व में जारी किए गए तीन नोटिसों की वजह और उन मामलों में हुई कार्रवाई का विवरण भी महत्वपूर्ण है। यह जानकारी सामने आने पर स्पष्ट हो सकेगा कि पहले की शिकायतें किस प्रकृति की थीं और उनके निराकरण के बाद संबंधित कार्यप्रणाली में कितना सुधार हुआ।

बार-बार नोटिस के बाद भी क्यों उठ रहे सवाल?

एक वर्ष में तीन नोटिस और 30 हजार रुपये जुर्माने की वसूली की जानकारी सामने आने के बाद निगम की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। नोटिस और जुर्माने का उद्देश्य केवल संबंधित पक्ष के विरुद्ध कार्रवाई करना नहीं, बल्कि भविष्य में लापरवाही रोकना और कार्यप्रणाली में सुधार सुनिश्चित करना भी होता है।

यदि पहले की कार्रवाई के बावजूद नई शिकायत सामने आती है, तो प्रशासन के लिए यह समीक्षा करना जरूरी हो जाता है कि ठेकेदार को दिए गए निर्देशों का पालन हुआ या नहीं और संबंधित कार्यों की निगरानी किस तरह की गई। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पूर्व के मामलों में ठेकेदार के जवाब पर क्या निर्णय लिया गया था।

ऐसी स्थिति में केवल आर्थिक दंड तक सीमित रहने के बजाय शिकायतों के रिकॉर्ड, निरीक्षण रिपोर्ट और अनुबंध की शर्तों के आधार पर कार्रवाई की प्रभावशीलता का आकलन किया जाना चाहिए। हालांकि, मौजूदा मामले में ठेका निरस्त करने या किसी अन्य कठोर दंड की आवश्यकता है या नहीं, इसका निर्णय जांच के निष्कर्षों और लागू प्रावधानों के आधार पर ही लिया जा सकता है।

महिला कर्मचारियों की सुरक्षा भी अहम मुद्दा

इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा है। निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ट्रैक्टर पर बैठी महिलाएं स्वच्छता दीदी नहीं, बल्कि संबंधित ठेकेदार की कर्मचारी थीं। इसके बावजूद उनकी सुरक्षा का सवाल उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी भी श्रमिक को काम पर लगाते समय सुरक्षित परिस्थितियां उपलब्ध कराना आवश्यक है।

जांच में यह देखा जाना चाहिए कि महिलाओं को किस काम के लिए नियोजित किया गया था, उनके आवागमन की व्यवस्था क्या थी और क्या ट्रैक्टर पर इस तरह बैठकर यात्रा करना निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप था। यदि जांच में असुरक्षित कार्यप्रणाली या निर्देशों की अनदेखी सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

निगम प्रशासन ने कहा है कि स्वच्छता दीदियों के मान-सम्मान और सुविधाओं का ध्यान रखना उसकी प्राथमिकता है। व्यापक रूप से देखें तो स्वच्छता कार्यों में लगे सभी कर्मचारियों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। इसके लिए ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश देने के साथ-साथ नियमित निरीक्षण और शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई की व्यवस्था प्रभावी होनी चाहिए।

निगम प्रशासन की जवाबदेही भी महत्वपूर्ण

नगर निगम क्षेत्र में स्वच्छता संबंधी कार्यों का संचालन ठेकेदारों के माध्यम से होने पर उनकी निगरानी की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी घटना के बाद कार्रवाई करना आवश्यक है, लेकिन उससे भी जरूरी है कि नियमित निरीक्षण के दौरान संभावित खामियों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर किया जाए।

मौजूदा मामले में यह जानना जरूरी होगा कि पहले जारी नोटिसों के बाद संबंधित ठेकेदार के कामकाज की समीक्षा की गई थी या नहीं। यदि कार्रवाई के बाद भी सुधार नहीं हुआ, तो निगरानी व्यवस्था में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए। शिकायतों का व्यवस्थित रिकॉर्ड, निरीक्षण रिपोर्ट और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक होने से पारदर्शिता बढ़ सकती है।

वहीं, संबंधित ठेकेदार और सीएसबी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना भी जरूरी है। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह तय होना चाहिए कि लापरवाही हुई है या नहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

अब आगे क्या करेगा निगम?

फिलहाल, कचरे से भरे ट्रैक्टर पर दो महिलाओं के बैठे होने के मामले में cseb और ठेकेदार रशीद खान को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। स्वास्थ्य अधिकारी के अनुसार, संबंधित ठेकेदार पर पिछले एक वर्ष में तीन बार नोटिस की कार्रवाई हो चुकी है और 30 हजार रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है। अब मौजूदा मामले में संबंधित पक्षों के जवाब और जांच के निष्कर्षों का इंतजार है।

मुख्य सवाल यह है कि बार-बार नोटिस और जुर्माना वसूलने के बाद भी यदि लापरवाही से जुड़ा मामला सामने आता है, तो क्या निगम प्रशासन निगरानी व्यवस्था की समीक्षा कर ठोस कदम उठाएगा? जांच में उल्लंघन प्रमाणित होने पर क्या अनुबंध की शर्तों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी, यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा।

स्वच्छता व्यवस्था की सफलता केवल कचरे के संग्रहण और परिवहन तक सीमित नहीं है। इसमें कर्मचारियों की सुरक्षा, निर्धारित मानकों का पालन और ठेकेदारों की जवाबदेही भी शामिल है। ऐसे में निगम प्रशासन के सामने चुनौती है कि वह निष्पक्ष जांच के जरिए वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे और जरूरत पड़ने पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करे। अब निगाहें संबंधित पक्षों के जवाब और निगम प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं।

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