कोरबा

प्रधानमंत्री आवास में गड़बड़ी की शिकायत, 26 मकान अधूरे छोड़ने का आरोप; कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

 

कोरबा (ट्रैक सिटी)। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण अधूरा छोड़ने और राशि निकाले जाने की शिकायत लेकर लेमरू, नकिया सहित आसपास की पंचायतों के ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई हितग्राहियों के मकान अधूरे हैं, जबकि निर्माण के नाम पर राशि निकाल ली गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जांच टीम गठित कर पूरे क्षेत्र में जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, करीब 26 आवास ऐसे हैं, जिनका निर्माण अधूरा है। कई मकानों में केवल डीपीसी स्तर तक काम हुआ है, जबकि भुगतान अंतिम चरण तक निकाले जाने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों ने कुछ ठेकेदारों पर निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। शिकायत में अली खान, राजू खान और अन्य ठेकेदारों के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

ग्रामीणों ने बताया कि पहाड़ी कोरवा समाज के लोगों के आवासों की स्थिति जानने के लिए गांव-गांव जाकर जानकारी जुटाई गई। इस दौरान कुछ ऐसे मामले सामने आए, जिनमें हितग्राहियों को अपने नाम से स्वीकृत आवास की वास्तविक स्थिति की जानकारी तक नहीं थी। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई कि बैंक खाते होल्ड होने का हवाला देकर उनसे हस्ताक्षर कराए जाते हैं और राशि निकाली जाती है। हालांकि, इस संबंध में भी जांच की आवश्यकता है।

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, लेमरू और नकिया पंचायत क्षेत्र के अलावा अन्य गांवों में भी अधूरे आवासों की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों ने कलेक्टर को प्रस्ताव और शिकायत सौंपकर निर्माण कार्य पूरे कराने तथा राशि निकासी की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।

कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि लेमरू क्षेत्र से प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी की शिकायत मिली है। शिकायत के अनुसार, कुछ लोगों को मकान निर्माण का काम सौंपा गया था, लेकिन संबंधित व्यक्तियों द्वारा निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया। इस मामले में त्वरित कार्रवाई के लिए जांच टीम गठित कर पूरे क्षेत्र में जांच करने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

अब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कितने आवास अधूरे हैं, कितनी राशि निकाली गई है और इस मामले में किन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है।

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