गीतकुंवारी के ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जताई नाराजगी, अपर कलेक्टर अभिषेक राठौर को सौंपा ज्ञापन, निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग
कोरबा (ट्रैक सिटी)। जिले के ग्राम गीतकुंवारी के ग्रामीणों ने वन क्षेत्र में दूसरे बांध के निर्माण पर आपत्ति जताते हुए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों के मुताबिक, लबेद नाला पर उनके पूर्वजों ने करीब 70 से 80 वर्ष पहले बांध बनाकर मेड़ तैयार की थी। इस जलस्रोत से गांव की लगभग 1200 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होती है। अब इसी नाले में पुराने बांध से करीब 500 मीटर नीचे ग्राम गिरारी के लोगों द्वारा एक अन्य बांध का निर्माण कराया जा रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि इससे पुरानी जल संरचना प्रभावित होगी और खेती के लिए पानी की उपलब्धता पर संकट खड़ा हो सकता है।
इस मुद्दे को लेकर ग्रामीण पहले भी कलेक्टर के जनदर्शन में शिकायत कर चुके हैं। उन्होंने वन विभाग के गीतकुंवारी बीट अंतर्गत ग्राम गिरारी में चल रहे निर्माण कार्य को तत्काल रुकवाने का आग्रह किया था। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी के विरोध में बुधवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण दोबारा कलेक्ट्रेट पहुंचे और डिप्टी कलेक्टर अभिषेक राठौर को आवेदन सौंपकर अपनी समस्या से अवगत कराया।
ग्रामीणों ने बताया कि लबेद नाला पर बनी पुरानी मेड़ उनके लिए वर्षों से सिंचाई का प्रमुख आधार रही है। गांव के लोग समय-समय पर स्वयं इसकी मरम्मत और रखरखाव करते हैं। बरसात के दौरान इसमें पानी एकत्रित होता है, जिसका उपयोग आसपास के खेतों में कृषि कार्य के लिए किया जाता है। करीब 1200 एकड़ जमीन की सिंचाई इसी व्यवस्था पर निर्भर होने के कारण किसान इसे अपनी आजीविका से जुड़ा महत्वपूर्ण संसाधन मानते हैं।
उनका कहना है कि पुराने बांध से महज 500 मीटर नीचे नई जल संरचना तैयार किए जाने से पानी के बहाव और संग्रहण की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव आ सकता है। इससे पुरानी मेड़ के डूबने अथवा उसकी उपयोगिता कम होने की आशंका है। यदि ऐसा हुआ तो खेती-किसानी प्रभावित होगी और किसानों को सिंचाई के लिए दूसरे विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं।
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि वन विभाग के क्षेत्र में निर्माण कार्य होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा मामले पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है। उनका आरोप है कि पूर्व में शिकायत किए जाने के बाद भी मौके की स्थिति का उचित परीक्षण नहीं कराया गया। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम स्थल का निरीक्षण करे तथा तकनीकी पहलुओं की जांच के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाए।
कलेक्ट्रेट में ग्रामीणों ने डिप्टी कलेक्टर से मांग की कि विवाद का जल्द निराकरण किया जाए और जांच पूरी होने तक नए बांध का निर्माण कार्य रोक दिया जाए। उनका कहना है कि समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ तो इसका खामियाजा उन किसानों को भुगतना पड़ सकता है, जिनकी खेती वर्षों से इसी जलस्रोत पर निर्भर है।
वन विभाग के अधिकारी ने नहीं उठाया फोन
मामले में वन विभाग का पक्ष जानने के लिए चैनल ने संबंधित एसडीओ मणिकांत वर्मा से मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इस वजह से निर्माण कार्य की स्थिति और ग्रामीणों के आरोपों पर विभाग का पक्ष सामने नहीं आ सका।
फिलहाल ग्रामीणों की मांग पर प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच के बाद उनकी पुरानी सिंचाई व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए उचित निर्णय लिया जाएगा।
