तीन महीने पहले हुई थी लैप्रोस्कोपिक सर्जरी, टांके वाली जगह से निकलने लगा मवाद; कल्चर जांच के सैंपल को लेकर भी उठाए सवाल
कोरबा (ट्रैक सिटी)। शहर के शिवाय हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद एक महिला की तबीयत लगातार बिगड़ने और घाव से मवाद निकलने का मामला सामने आया है। पीड़ित महिला के पति विकास कुमार अग्रवाल ने पूरे मामले को लेकर जिला कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपते हुए अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सकों पर संभावित चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मेडिकल रिकॉर्ड की पड़ताल करने और दोषी पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, विकास अग्रवाल की पत्नी सोनम अग्रवाल का लगभग तीन महीने पहले शिवाय हॉस्पिटल, कोरबा में बच्चेदानी एवं फैलोपियन ट्यूब से संबंधित लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से ऑपरेशन किया गया था। आरोप है कि ऑपरेशन के करीब तीन महीने बाद टांके वाली जगह से मवाद निकलने लगा और वहां सूजन एवं घाव की समस्या शुरू हो गई। इतना ही नहीं, ऑपरेशन के दौरान कैमरा डालने के लिए बनाए गए दूसरे स्थान से भी मवाद निकलने लगा।
परिजनों का कहना है कि उन्होंने संबंधित डॉक्टर से संपर्क कर समस्या की जानकारी दी। डॉक्टर द्वारा दवाइयां दी गईं, लेकिन इसके बावजूद महिला की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद सीटी स्कैन कराया गया। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि 24 अक्टूबर 2026 की सीटी स्कैन रिपोर्ट में ऑपरेशन वाली जगह पर लगभग 80 सीसी मवाद जमा होने की पुष्टि हुई। रिपोर्ट में मवाद का आकार 6.2 × 5.2 × 5 सेंटीमीटर बताया गया है। संक्रमण पेट की दीवार की त्वचा के नीचे, मांसपेशियों और आसपास के ऊतकों तक फैलने की बात भी सामने आई।
सीटी स्कैन रिपोर्ट दिखाने के बाद अस्पताल में पुराने टांके वाली जगह पर चीरा लगाकर घाव खोल दिया गया। इसके बाद बिना टांके लगाए घाव को खुला रखकर प्रतिदिन ड्रेसिंग की जाने लगी। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद उनकी पत्नी को राहत नहीं मिली। कुछ समय बाद दूसरी जगह से भी मवाद निकलने लगा, जिसके चलते वहां भी चीरा लगाकर घाव खोलना पड़ा।

कल्चर जांच के सैंपल को लेकर गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल पस की कल्चर एवं सेंसिटिविटी जांच को लेकर उठाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने कई बार डॉक्टर से घाव से निकलने वाले मवाद की कल्चर जांच के लिए सैंपल लेने अथवा संबंधित लैब में भेजने का आग्रह किया था। डॉक्टर द्वारा सैंपल भेजने की बात कही गई, लेकिन अगले दिन जब उन्होंने संबंधित लैब में संपर्क कर जानकारी ली तो वहां के कर्मचारियों ने सोनम अग्रवाल के नाम से कोई सैंपल प्राप्त नहीं होने और रिकॉर्ड में भी ऐसी कोई एंट्री नहीं होने की जानकारी दी।
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि उनके पास लैब में हुई बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग भी प्रमाण के रूप में उपलब्ध है। उनका सवाल है कि जब अस्पताल की ओर से कल्चर जांच के लिए सैंपल भेजने की बात कही गई थी, तो फिर संबंधित लैब में सैंपल प्राप्त क्यों नहीं हुआ? आखिर किस आधार पर जांच रिपोर्ट देने की बात कही जा रही थी?
निष्पक्ष मेडिकल जांच और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
विकास अग्रवाल ने कलेक्टर से छह से अधिक बिंदुओं के साथ विस्तृत जांच की मांग की है। इसमें ऑपरेशन से लेकर वर्तमान उपचार तक पूरे मामले की निष्पक्ष चिकित्सकीय जांच, संबंधित डॉक्टर एवं उपचार करने वाली टीम से लिखित स्पष्टीकरण, कल्चर जांच के लिए सैंपल लेने और भेजने की तारीख, कर्मचारी एवं लैब के रिकॉर्ड की पड़ताल शामिल है।
इसके अलावा अस्पताल और संबंधित लैब के रजिस्टर, सैंपल रिसीविंग रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई है। उन्होंने अपनी पत्नी की पूरी मेडिकल फाइल, ऑपरेशन नोट्स, डिस्चार्ज समरी, दवाइयों एवं जांच रिपोर्ट की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया है।
शिकायत में यह भी मांग की गई है कि महिला की वर्तमान स्थिति को देखते हुए मेडिकल बोर्ड के माध्यम से किसी स्वतंत्र वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं जनरल सर्जन से जांच कराई जाए तथा आगे के उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जांच के दौरान यदि किसी डॉक्टर, अस्पताल प्रबंधन या कर्मचारी की चिकित्सकीय लापरवाही, रिकॉर्ड में गड़बड़ी अथवा अन्य अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी को बिना जांच दोषी ठहराना नहीं, बल्कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाना है। लगातार घाव खुलने, मवाद निकलने और उपचार के बावजूद राहत नहीं मिलने से महिला एवं उसका परिवार परेशान है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और मामले में निष्पक्ष जांच के लिए क्या कदम उठाता है।

पहले भी लग चुके हैं अस्पताल प्रबंधन पर आरोप, कार्रवाई की जानकारी नहीं
शिवाय हॉस्पिटल को लेकर इससे पहले भी अलग-अलग मामलों में कई आरोप सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन शिकायतों पर संबंधित विभागों द्वारा अब तक क्या जांच की गई और क्या कार्रवाई हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मौजूदा मामला सामने आने के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों द्वारा उस समय डॉक्टर के उपस्थित नहीं होने की बात कही गई। अस्पताल प्रबंधन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल पाने के कारण इस मामले में उनका पक्ष फिलहाल सामने नहीं आ सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
