छत्तीसगढ़

निराश्रित गौवंश संरक्षण के लिए राज्य सरकार की बड़ी पहल, गौधाम योजना का बढ़ रहा दायरा

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(ट्रैक सिटी)/ छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी गौधाम योजना के माध्यम से प्रदेश में घुमन्तू एवं निराश्रित पशुधन के संरक्षण और सुव्यवस्थित व्यवस्थापन की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाते हुए राज्य सरकार ने ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता देने तथा शहरी गौठानों को भी योजना में शामिल किया है, जिससे भविष्य में प्रदेशभर में गौधामों का विस्तार और अधिक गति से हो सकेगा।

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घुमन्तू एवं निराश्रित पशुधन के व्यवस्थापन के लिए राज्य शासन ने 6 अगस्त 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को गौधाम योजना की स्वीकृति प्रदान की थी। योजना के तहत ऐसी शासकीय भूमि एवं गौठानों का चयन किया जाता है, जहां आवश्यक अधोसंरचना उपलब्ध हो तथा जो राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित हों। इन गौधामों का संचालन स्वयंसेवी संस्थाओं, पंजीकृत गौशालाओं, एनजीओ, एफपीओ, ट्रस्ट तथा अब संशोधित नियमों के अनुसार ग्राम पंचायतों के माध्यम से किया जा रहा है।

गौधाम की स्थापना के लिए कलेक्टर एवं जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा, पंचायत का अनापत्ति प्रमाण-पत्र तथा भौतिक सत्यापन जैसी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। इसके बाद आवेदन छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजे जाते हैं, जहां क्रियान्वयन समिति द्वारा प्रत्येक तीन माह में विस्तृत समीक्षा कर शासन को प्रशासनिक स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भेजा जाता है। स्वीकृति, अनुबंध एवं पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से गौधामों में घुमन्तू पशुओं का व्यवस्थापन सुनिश्चित किया जाता है।

पशुधन विकास विभाग द्वारा 30 जुलाई 2026 को नियमों में संशोधन कर गौधाम संचालन के लिए ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता देने तथा शहरी गौठानों को योजना में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में निराश्रित गौवंश के संरक्षण के लिए व्यापक आधार तैयार हो रहा है।

योजना के अंतर्गत अब तक प्राप्त 408 आवेदनों में से 151 गौधामों को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इनमें 88 गौधामों का पंजीयन पूर्ण हो गया है तथा 42 गौधामों में लगभग 5,109 निराश्रित पशुधन का संरक्षण एवं व्यवस्थापन किया जा रहा है। शेष स्वीकृत गौधामों में भी पंजीयन एवं संचालन की प्रक्रिया जारी है।

राज्य गौ सेवा आयोग ने स्पष्ट किया है कि शासन द्वारा स्वीकृत योजना में गौधामों की कोई निर्धारित लक्ष्य संख्या तय नहीं है। हालांकि, गौ-सेवा आयोग के अध्यक्ष की परिकल्पना के अनुसार प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में 10 उत्कृष्ट गौठानों का चयन कर लगभग 1,460 गौधाम स्थापित करने की दिशा में चरणबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्य सरकार का लक्ष्य निराश्रित एवं घुमन्तू गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी समुचित देखभाल सुनिश्चित करना है। जिलों से आवश्यकता के अनुरूप लगातार आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, जिन पर नियमानुसार कार्रवाई जारी है। संशोधित प्रावधानों के बाद आने वाले समय में प्रदेश में गौधामों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

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