दीपावली पर वेतन नहीं मिलने से परेशान को-ऑर्डिनेटर ने श्रम विभाग में की शिकायत, अस्पताल संचालक पर लगाए गंभीर आरोप
कोरबा (ट्रैक सिटी)। आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पताल को 1.61 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दिलाने वाले कर्मचारी को दीपावली के मौके पर वेतन के लिए परेशान होना पड़ा। नया बस स्टैंड टीपी नगर स्थित एम.जे.एम. हॉस्पिटल के आयुष्मान को-ऑर्डिनेटर विनोद कुमार महतो ने अस्पताल के संचालक एमडी प्रिंस जैन के खिलाफ सहायक श्रम आयुक्त से शिकायत की है। उन्होंने अक्टूबर माह का बकाया वेतन दिलाने और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, विनोद कुमार महतो 7 मार्च 2026 से अस्पताल में आयुष्मान को-ऑर्डिनेटर के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें प्रतिमाह 23 हजार रुपये वेतन और 3 हजार रुपये पीएफ के रूप में दिए जाने का उल्लेख है। कर्मचारी का दावा है कि उनके प्रयासों से आयुष्मान भारत योजना के तहत 506 प्रकरणों में अस्पताल को कुल 1 करोड़ 61 लाख 43 हजार 131 रुपये की राशि प्राप्त हुई है।
छुट्टी को लेकर वेतन रोकने का आरोप
विनोद महतो का आरोप है कि अक्टूबर माह का वेतन दीपावली से ठीक पहले रोक दिया गया। प्रबंधन की ओर से इसकी वजह संचालक की अनुमति के बिना छुट्टी लेना बताई गई, जबकि कर्मचारी का कहना है कि उन्होंने अस्पताल के एडमिन अधिकारी से विधिवत छुट्टी स्वीकृत कराई थी। उनका आरोप है कि संचालक से व्यक्तिगत अनुमति नहीं लेने के कारण पूरे महीने का वेतन रोक दिया गया।
राशन तक के लिए नहीं बचे पैसे
कर्मचारी ने शिकायत में बताया कि वेतन नहीं मिलने से उनका घरेलू बजट पूरी तरह बिगड़ गया। आर्थिक स्थिति ऐसी हो गई कि राशन खरीदना तक मुश्किल हो गया और दीपावली पर मिठाई व नए कपड़े खरीदने की खुशियां भी अधूरी रह गईं। उन्होंने पिछले दो-तीन महीनों से अस्पताल संचालक द्वारा अनावश्यक डांट-फटकार किए जाने का आरोप भी लगाया है।
मानसिक तनाव के चलते अस्पताल में भर्ती
विनोद महतो ने शिकायत में मानसिक तनाव, अपमान और परेशानी का जिक्र करते हुए अपनी तबीयत बिगड़ने की बात कही है। उन्होंने बताया है कि वर्तमान में वह जेपी अस्पताल में भर्ती हैं।
कलेक्टर और एसपी को भी भेजी शिकायत की प्रतिलिपि
6 नवंबर 2026 को सहायक श्रम आयुक्त को सौंपे गए शिकायत पत्र में कर्मचारी ने अक्टूबर माह का बकाया वेतन तत्काल दिलाने और भविष्य में कर्मचारियों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं करने के निर्देश देने की मांग की है। उन्होंने शिकायत के बाद अपने खिलाफ झूठी शिकायत कराए जाने की आशंका भी जताई है। शिकायत की प्रतिलिपि कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई है।
अब सवाल यह है कि आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल को करोड़ों रुपये का भुगतान दिलाने में भूमिका निभाने वाले कर्मचारी को अपना मेहनताना पाने के लिए श्रम विभाग का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़ा?
फिलहाल इस मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

