कोरबा

आयुर्वेदिक उपचार से पूरे परिवार को मिली राहत, राजमणि सोंठीया ने साझा किया अनुभव।

WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.39.04 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.39.05 (2)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.39.08 (2)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.39.05 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.39.04 (2)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.39.05
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.39.07 (2)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.39.06
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.39.06 (2)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.39.07
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.39.07 (1)

कोरबा (ट्रैक सिटी)/ आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ-साथ आयुर्वेदिक उपचार के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। कोरबा के पीडब्ल्यूडी कॉलोनी निवासी राजमणि सोंठीया ने दावा किया है कि उनके परिवार को लंबे समय से चली आ रही विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में आयुर्वेदिक उपचार से राहत मिली है।

WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.39.04
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.39.08 (1)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.39.07 (2)
WhatsApp Image 2026-08-14 at 23.39.07

राजमणि सोंठीया के अनुसार उनके पुत्र को लंबे समय से साइनस की समस्या थी। सांस लेने में परेशानी, लगातार सर्दी-जुकाम और थकान जैसी समस्याओं के कारण परिवार ने रायपुर और बिलासपुर सहित कई स्थानों पर उपचार कराया। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों द्वारा ऑपरेशन की सलाह भी दी गई थी, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिलने पर उन्होंने आयुर्वेदिक चिकित्सा का सहारा लिया।

राजमणि सोंठीया के मुताबिक परिचितों की सलाह पर उन्होंने कोरबा के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा से संपर्क किया। नाड़ी परीक्षण और आयुर्वेदिक उपचार के बाद उनके पुत्र की स्थिति में सुधार हुआ और कुछ महीनों में स्वास्थ्य लाभ मिला।

उन्होंने बताया कि इसके बाद वे स्वयं डेंगू से पीड़ित हो गए थे। गंभीर स्थिति के दौरान उन्होंने पुनः आयुर्वेदिक उपचार लिया और उनके अनुसार एक सप्ताह के भीतर स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

राजमणि सोंठीया ने यह भी बताया कि उनकी पत्नी को गांठ (लंप) संबंधी समस्या थी। कई स्थानों पर उपचार के बावजूद राहत नहीं मिलने पर उन्होंने आयुर्वेदिक चिकित्सा का सहारा लिया। उनका दावा है कि नियमित उपचार और परामर्श के बाद उनकी पत्नी की समस्या में सुधार हुआ तथा बाद की जांच रिपोर्ट सामान्य आई।

इस संबंध में आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जो ऋषि-मुनियों की परंपरा और ज्ञान पर आधारित है। उनका कहना है कि आयुर्वेद का उद्देश्य रोग के मूल कारण को समझकर शरीर के संतुलन को स्थापित करना है।

राजमणि सोंठीया ने अपने अनुभव साझा करते हुए आयुर्वेदिक चिकित्सा के प्रति आभार व्यक्त किया और लोगों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह लेने की अपील की।

आयुर्वेदिक उपचार से जुड़े ऐसे अनुभवों के कारण क्षेत्र में लोगों का रुझान इस चिकित्सा पद्धति की ओर बढ़ रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ किसी भी गंभीर बीमारी के उपचार के लिए योग्य चिकित्सक की सलाह और आवश्यक जांच को महत्वपूर्ण मानते हैं।

 

Editor in chief | Website |  + posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button