कोरबा (ट्रैक सिटी)। शहर के इंदिरा स्टेडियम परिसर में संचालित खेल अकादमी की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बच्चों को खेल प्रशिक्षण देने वाले इस परिसर में विद्युत व्यवस्था, सफाई, ग्राउंड की देखरेख, घास कटिंग से लेकर स्वास्थ्य सुविधाओं तक कई स्तरों पर लापरवाही के आरोप सामने आ रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि स्टेडियम और अकादमी की जिम्मेदारी को लेकर संबंधित प्रबंधन एक-दूसरे की ओर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं।
चार दिन से बंद मैदान की लाइट, जनरेटर भी पड़ा है बंद
जानकारी के अनुसार खेल अकादमी के मैदान में पिछले करीब चार दिनों से सभी लाइटें बंद हैं। स्टेडियम परिसर के बाहर लगी कई लाइटें भी सही तरीके से काम नहीं कर रही हैं। कुछ लाइटें बार-बार जलने-बुझने के कारण डीजे लाइट की तरह नजर आती हैं।
इतना ही नहीं, खेल अकादमी में लगा जनरेटर भी लंबे समय से बंद पड़ा बताया जा रहा है। बिजली व्यवस्था बाधित होने की स्थिति में जनरेटर बच्चों और खिलाड़ियों के लिए बैकअप व्यवस्था के रूप में काम आ सकता है, लेकिन उसके रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी लेने के लिए भी दोनों संबंधित प्रबंधन आगे नहीं आ रहे हैं।
दिखावे की घास कटिंग, मैदान की हकीकत कुछ और
मैदान में घास कटिंग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि बीच-बीच में कुछ हिस्सों की घास काटकर व्यवस्था दुरुस्त होने का दिखावा किया जाता है, लेकिन मैदान के अंदर की वास्तविक स्थिति कुछ और है।
लंबी घास और झाड़ियों के बीच बरसात के मौसम में जहरीले जीव-जंतुओं के छिपे होने की आशंका बनी रहती है। मैदान में आने वाला व्यक्ति यदि मौके पर जाकर स्थिति देखे तो उसे वास्तविक स्थिति का अंदाजा आसानी से हो सकता है।
ऐसे माहौल में बच्चों को खेल प्रशिक्षण देना उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जनता के टैक्स से बना स्टेडियम, सुविधा से जनता ही वंचित?
इंदिरा स्टेडियम का निर्माण सार्वजनिक संसाधनों और जनता से प्राप्त टैक्स के पैसों से हुआ है। ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठता है कि जिस स्टेडियम का उद्देश्य आम लोगों और खिलाड़ियों को सुविधाएं देना है, वहां आम जनता को आखिर कितनी और कैसी सुविधाएं मिल रही हैं?
स्टेडियम में सुबह और शाम बड़ी संख्या में लोग पैदल चलने, रनिंग और व्यायाम करने के लिए पहुंचते हैं। सुबह के समय परिस्थितियां कुछ बेहतर रहती हैं, लेकिन शाम ढलने के बाद कम रोशनी और लंबी घास के बीच लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर व्यायाम और रनिंग करने की मजबूरी बताई जा रही है।
यदि किसी व्यक्ति को अंधेरे या घास में छिपे किसी जहरीले जीव से नुकसान पहुंचता है तो इसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
आम लोगों के लिए बने स्टेडियम में संसाधन कितने?
जनता के पैसों से बने स्टेडियम में आम नागरिकों के लिए नियमित रूप से कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं, यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए। स्टेडियम में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, साफ-सुथरा मैदान, नियमित घास कटिंग, सुरक्षित वॉकिंग एवं रनिंग ट्रैक, स्वच्छता, पेयजल, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं सुनिश्चित होना जरूरी है।
सिर्फ स्टेडियम का निर्माण कर देना पर्याप्त नहीं है। उसका नियमित रखरखाव और जनता को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी संबंधित जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही है।
बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सबसे बड़ी जिम्मेदारी
खेल अकादमी में बच्चों के कमरों में एग्जॉस्ट फैन लंबे समय से बंद होने की शिकायत भी सामने आई है। वहीं, आकस्मिक चिकित्सा सुविधा के लिए कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण नहीं होने की जानकारी भी सामने आई है।
सबसे गंभीर बात यह है कि आज करीब पांच बच्चों को सांस लेने में तकलीफ होने के कारण अलग-अलग माध्यमों से अस्पताल भेजे जाने की जानकारी मिली है। हालांकि बच्चों की स्वास्थ्य समस्या का वास्तविक कारण चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन इस घटना के बाद अकादमी में स्वास्थ्य सुविधाओं की तत्काल समीक्षा आवश्यक हो जाती है।
बच्चों के लिए प्राथमिक चिकित्सा, आपातकालीन उपचार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और जरूरत पड़ने पर तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है।
जिम्मेदारी तय हो, आरोप-प्रत्यारोप नहीं
स्टेडियम की विद्युत व्यवस्था, जनरेटर, सफाई, घास कटिंग और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर यदि निगम प्रशासन और अकादमी संचालन से जुड़े प्रबंधन दोनों अपनी जिम्मेदारी से बचते हैं तो यह गंभीर प्रशासनिक स्थिति है।
बच्चों की सुरक्षा और आम जनता की जान-माल की जिम्मेदारी किसी भी स्थिति में एक-दूसरे पर नहीं डाली जा सकती। संबंधित दोनों प्रबंधन को स्पष्ट करना चाहिए कि स्टेडियम परिसर के किस हिस्से की जिम्मेदारी किस विभाग या संस्था की है और
उसके रखरखाव के लिए कौन जिम्मेदार है।
अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर पूरे स्टेडियम का निरीक्षण करें और विद्युत व्यवस्था, बंद जनरेटर, घास कटिंग, सफाई, बच्चों के आवास, स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की जांच करें।
जनता के टैक्स से बने स्टेडियम में जनता को सुरक्षित और बेहतर सुविधा मिलना उसका अधिकार है। वहीं खेल अकादमी में प्रशिक्षण ले रहे बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
अब देखना यह है कि खबर प्रकाशन के बाद निगम प्रशासन, संबंधित प्रबंधन और खेल अकादमी संचालक जिम्मेदारी तय करने के बजाय व्यवस्थाएं सुधारने के लिए कितनी गंभीरता दिखाते हैं।
बिल्कुल। समाचार में खेल अधिकारी की भूमिका और जवाबदेही जोड़ने से खबर और प्रभावी होगी। इसे इस तरह शामिल किया जा सकता है:
Writing
खेल अधिकारी की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
इंदिरा स्टेडियम में खेल अकादमी के संचालन और खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के बीच खेल विभाग के अधिकारी की भूमिका और जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खेल अधिकारी का दायित्व केवल खेल गतिविधियों और प्रतियोगिताओं के संचालन तक सीमित नहीं माना जा सकता, बल्कि खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध खेल मैदान, प्रशिक्षण स्थल और आवश्यक खेल सुविधाओं की स्थिति पर निगरानी रखना, संबंधित व्यवस्थाओं का निरीक्षण करना तथा कमियों की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाकर उनके निराकरण की दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का हिस्सा है।
विशेषकर जब परिसर में बच्चों और युवा खिलाड़ियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा हो, तब मैदान की सुरक्षा, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई, घास कटिंग, खेल संसाधनों की उपलब्धता और खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित वातावरण की स्थिति पर नियमित निगरानी बेहद जरूरी हो जाती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि खेल अकादमी परिसर में पिछले कई दिनों से लाइट बंद है, जनरेटर लंबे समय से बंद पड़ा है, मैदान में घास बढ़ी हुई है और बच्चों के स्वास्थ्य एवं आकस्मिक चिकित्सा सुविधा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, तो क्या संबंधित खेल अधिकारी द्वारा नियमित निरीक्षण किया गया? यदि निरीक्षण किया गया था तो इन कमियों को दूर कराने के लिए क्या कार्रवाई की गई?
खेल अधिकारी को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि इंदिरा स्टेडियम और खेल अकादमी की व्यवस्थाओं में उनकी भूमिका क्या है और खिलाड़ियों की सुरक्षा एवं सुविधाओं को लेकर उनकी जवाबदेही किस स्तर तक है।
यदि स्टेडियम की कुछ व्यवस्थाएं निगम प्रशासन या किसी अन्य संस्था के अधीन हैं, तब भी खेल विभाग के अधिकारियों द्वारा संबंधित एजेंसी को समस्याओं से अवगत कराना और खिलाड़ियों के हित में आवश्यक समन्वय करना अपेक्षित है। जिम्मेदारी किस विभाग की है, यह स्पष्ट करना प्रशासनिक विषय हो सकता है, लेकिन बच्चों और खिलाड़ियों की सुरक्षा के मामले में जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना किसी भी स्तर पर उचित नहीं कहा जा सकता।
अब देखने वाली बात होगी कि खबर सामने आने के बाद खेल विभाग के अधिकारी मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का जायजा लेते हैं या फिर निगम प्रशासन और अकादमी प्रबंधन की तरह जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालकर मामला टाल दिया जाता है।

