कोरबा

जागरूकता लाई रंग: ग्रामीणों ने नहीं मारा 6 फीट लंबा अहिराज, रेस्क्यू टीम बुलाकर बचाई जान

कोरबा (ट्रैक सिटी)। जिले में नोवा नेचर एवं वन विभाग द्वारा लगातार चलाए जा रहे जनजागरूकता अभियान का सकारात्मक असर अब दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में भी साफ दिखाई देने लगा है। पहले जहां ग्रामीण भय के कारण घरों में निकलने वाले सर्पों को मार देते थे, वहीं अब लोग उन्हें सुरक्षित बचाने के लिए रेस्क्यू टीम को सूचना देने लगे हैं। इसका ताजा उदाहरण सतरंगा रोड से लगे ग्राम जाम बहार में देखने को मिला, जहां एक ग्रामीण के घर में करीब 6 फीट लंबा अहिराज (रैट स्नेक) घुस गया।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर रात लगभग 10:30 बजे ग्रामीण के घर में ईंटों के बीच एक विशालकाय अहिराज सांप छिपकर बैठ गया। सांप को देखकर ग्रामीणों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया, लेकिन जागरूकता का परिचय देते हुए किसी ने भी उसे नुकसान नहीं पहुंचाया। ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग की रेस्क्यू टीम एवं नोवा नेचर के सर्प मित्र जितेंद्र सारथी को इसकी सूचना दी।
सूचना मिलते ही जितेंद्र सारथी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरी सावधानी और विशेषज्ञता के साथ ईंटों के बीच छिपे अहिराज का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। इसके बाद सांप को सुरक्षित थैले में रखकर उसके प्राकृतिक आवास जंगल में छोड़ दिया गया। रेस्क्यू के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और टीम के कार्य की सराहना की।
रेस्क्यू अभियान के दौरान जितेंद्र सारथी ने ग्रामीणों को सर्पों के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अधिकांश सांप मानव के लिए नुकसानदायक नहीं होते और पर्यावरण के संतुलन बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं सांप दिखाई दे तो उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखें, उसे मारने का प्रयास न करें और तुरंत रेस्क्यू टीम को सूचना दें। साथ ही सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक या अंधविश्वास का सहारा लेने के बजाय तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय उपचार कराना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
जितेंद्र सारथी ने बताया कि उनकी टीम पूरे कोरबा जिले में 24 घंटे सक्रिय रहकर लोगों की सूचना पर दिन-रात, यहां तक कि आधी रात में भी पहुंचकर वन्यजीवों का सुरक्षित रेस्क्यू कर रही है। उन्होंने कहा कि जिलेवासियों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है, जिसके कारण अधिक से अधिक वन्यजीवों का जीवन बचाया जा रहा है और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आ रही है।
उन्होंने जिले के प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सर्प संरक्षण एवं वन्यजीव बचाओ अभियान से जुड़े समाचारों और जनजागरूकता कार्यक्रमों के नियमित प्रकाशन एवं प्रसारण का ही परिणाम है कि आज ग्रामीण सर्पों को मारने के बजाय रेस्क्यू टीम को सूचना देना अपनी जिम्मेदारी समझ रहे हैं। यह बदलाव वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी और सकारात्मक उपलब्धि है।
रेस्क्यू हेल्पलाइन
📞 8817534455
📞 7999622151

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