कोरबा (ट्रैक सिटी)। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में जहाँ अक्सर लोग प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने का समय नहीं निकाल पाते, वहीं कोरबा जिले के दर्री स्थित साडा कॉलोनी से इंसानियत और जीवों के प्रति करुणा का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। एक घायल बसंता (Copper Smith Barbet/ठठेरा) पक्षी को समय रहते बचाकर त्रिपाठी परिवार ने न केवल उसकी जान बचाई, बल्कि समाज के सामने मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल भी पेश की।
जानकारी के अनुसार, बसंता पक्षी घायल अवस्था में जमीन पर पड़ा हुआ था। उसी दौरान आसपास घूम रहे आवारा कुत्ते उस पर झपटने ही वाले थे और कुछ ही क्षणों में उसकी जान जा सकती थी। तभी वहां से गुजर रहे त्रिपाठी परिवार की नजर उस असहाय पक्षी पर पड़ी। परिवार ने बिना समय गंवाए तत्काल उसे कुत्तों के हमले से सुरक्षित बचाया और बेहद सावधानी एवं स्नेह के साथ सुरक्षित स्थान पर रखा।
घटना की सूचना तुरंत वन विभाग एवं नोवा नेचर को दी गई। विभाग के निर्देशानुसार वन्यजीव रेस्क्यू कार्य से जुड़े जितेंद्र सारथी ने मौके पर पहुंचकर घायल पक्षी का सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसकी आवश्यक देखभाल सुनिश्चित की। समय पर किए गए इस प्रयास से पक्षी को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है।
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि यह घटना केवल एक पक्षी के बचाव तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी देती है कि पृथ्वी पर प्रत्येक जीव का जीवन समान रूप से मूल्यवान है। यदि प्रत्येक नागरिक थोड़ी-सी जागरूकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय दे, तो हर वर्ष हजारों घायल पक्षियों और वन्यजीवों को समय रहते बचाया जा सकता है।
रेस्क्यूकर्ता जितेंद्र सारथी ने त्रिपाठी परिवार की इस सराहनीय पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे जागरूक नागरिक समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि यदि कहीं कोई घायल या संकटग्रस्त पक्षी अथवा वन्यजीव दिखाई दे, तो उसे स्वयं उपचार करने या अनावश्यक रूप से छूने का प्रयास न करें। इसकी सूचना तुरंत वन विभाग या अधिकृत रेस्क्यू टीम को दें, ताकि वैज्ञानिक एवं सुरक्षित तरीके से उसका उपचार और संरक्षण किया जा सके।
उन्होंने कहा कि समय पर दी गई सूचना और लोगों की संवेदनशीलता ही वन्यजीवों के संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है।
वन्यजीव सहायता एवं रेस्क्यू हेल्पलाइन:
📞 8817534455
📞 7999622151
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