कोरबा

सुदूर वनांचल लेमरू की मलेरिया मुक्त क्षेत्र की ओर प्रेरणादायक यात्रा।

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कोरबा (ट्रैक सिटी)/ कोरबा ब्लॉक का सुदूर वनांचल और पूर्व में सुविधाविहीन रहा क्षेत्र लेमरू, जो जिला मुख्यालय से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, आज स्वास्थ्य जागरूकता और सामूहिक प्रयासों की बदौलत मलेरिया मुक्त होने की दिशा में अग्रसर है. यह क्षेत्र पहले घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण भारी मलेरिया प्रभावित माना जाता था, जहाँ हर वर्ष बरसात के मौसम में जागरूकता की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित पहुँच के कारण बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से बीमार हो जाते थे. इस क्षेत्र में मलेरिया का भय इतना गहरा था कि बाहरी व्यक्ति यहाँ आने से कतराते थे और आने से पहले अनिवार्य रूप से मच्छरदानी या बचाव की दवाओं की व्यवस्था करते थे. यहाँ तक कि समाज में यह भ्रांति व्याप्त थी कि लेमरू के पानी में ही मलेरिया है, जिसके डर से लोग इस क्षेत्र में अपनी बेटियों का विवाह तक करने से डरते थे.

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इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों के अभाव के बावजूद महामारी के समय शिविर लगाकर और लोगों को जागरूक कर इस बीमारी के आतंक को कम करने का प्रयास शुरू किया. स्वास्थ्य विभाग, मितानिनों और स्थानीय समुदाय के संयुक्त प्रयासों से लेमरू ने मलेरिया नियंत्रण में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. विभाग द्वारा एक प्रभावी रणनीति के तहत घर-घर सर्वे कर बुखार के संदिग्ध मरीजों की आरडी किट से तुरंत जाँच की गई और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से लोगों को मलेरिया के लक्षणों व बचाव के प्रति जागरूक किया गया. ग्रामीणों को घरों के आसपास जल-जमाव रोकने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया ताकि मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट किया जा सके।

अभियान के दौरान पूरे क्षेत्र में डीडीटी का छिड़काव सुनिश्चित किया गया और सभी घरों, हॉस्टलों तथा आश्रमों में मच्छरदानी वितरित कर उनके नियमित उपयोग की निगरानी की गई. स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मितानिनों ने शिविरों के माध्यम से स्थल पर ही क्लोरोक्वीन, पैरासिटामॉल और एसीटी किट का सेवन कराया. स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा क्षेत्र का निरंतर भ्रमण, कर्मचारियों का मुख्यालय में निवास और अस्पताल का 24ग7 संचालन इस सफलता के मुख्य आधार रहे. इन संयुक्त प्रयासों और ग्रामीणों द्वारा इस लड़ाई को एक जन-अभियान बनाने का परिणाम यह रहा कि आज लेमरू में मलेरिया के मामलों में भारी कमी आई है. लेमरू की यह सफलता सिद्ध करती है कि सामूहिक प्रयास से कठिन से कठिन चुनौती को भी जीता जा सकता है और यह अन्य वनांचल क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गया है।

 

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