कोरबा

राष्ट्रीय तितली ज्ञान दिवस,तितलियाँ पर्यावरण संतुलन की महत्वपूर्ण कड़ी – जितेंद्र सारथी।

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कोरबा (ट्रैक सिटी)/ कोरबा हर वर्ष 14 मार्च को राष्ट्रीय तितली ज्ञान दिवस मनाया जाता है,इस दिवस का उद्देश्य लोगों को तितलियों के महत्व, उनके जीवन चक्र तथा पर्यावरण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूक करना है,तितलियाँ प्रकृति की सुंदरता का प्रतीक होने के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। ये जैव विविधता (Biodiversity) का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और किसी क्षेत्र के पर्यावरण की गुणवत्ता का संकेत भी देती हैं,जहां तितलियों की संख्या अधिक होती है, वहां का वातावरण अपेक्षाकृत स्वच्छ और प्राकृतिक रूप से संतुलित माना जाता है।

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तितलियाँ मुख्य रूप से फूलों के रस (Nectar) पर निर्भर रहती हैं,जब तितली एक फूल से दूसरे फूल पर जाती है तो उसके शरीर और पैरों पर परागकण (Pollen) चिपक जाते हैं, इसके बाद जब वह किसी दूसरे फूल पर बैठती है तो ये परागकण उस फूल के वर्तिकाग्र (Stigma) तक पहुंच जाते हैं, इस प्रक्रिया को परागण (Pollination) कहा जाता है, इसी परागण की प्रक्रिया से पौधों में बीज और फल बनने में सहायता मिलती है, जिससे वनस्पतियों का जीवन चक्र आगे बढ़ता है और पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होता है।

तितलियों का जीवन चक्र भी प्रकृति का एक अद्भुत उदाहरण है, जिसमें अंडा, लार्वा (इल्ली), प्यूपा (कोकून) और अंत में वयस्क तितली का चरण शामिल होता है,यह परिवर्तन प्रकृति में जीवन के विकास और अनुकूलन का प्रतीक है,

पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से यह आवश्यक है कि हम प्राकृतिक आवास, फूलों वाले पौधों और हरित क्षेत्रों को संरक्षित रखें ताकि तितलियों और अन्य परागण करने वाले जीवों का अस्तित्व सुरक्षित रह सके।

जितेंद्र सारथी ने इस अवसर पर आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा की अपने आसपास अधिक से अधिक पौधे लगाएं, रासायनिक कीटनाशकों का कम उपयोग करें तथा जैव विविधता के संरक्षण में सहयोग करें,तितलियों का संरक्षण दरअसल हमारे पर्यावरण और भविष्य के संरक्षण से जुड़ा हुआ है।

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