कोरबा (ट्रैक सिटी)। शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ अब स्कूली बच्चों के पढ़ने और सीखने का तरीका भी बदल रहा है। पारंपरिक कक्षा में किताबों और ब्लैकबोर्ड के माध्यम से मिलने वाली शिक्षा को अब आधुनिक डिजिटल तकनीक से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के पीएम श्री कोरबा टाउनशिप स्कूल में वर्चुअल रियलिटी (VR) लैब का सेटअप तैयार किया जा रहा है। यह जिले का पहला ऐसा शैक्षणिक सेटअप होगा, जहां विद्यार्थी वर्चुअल रियलिटी तकनीक के माध्यम से विभिन्न विषयों को न केवल पढ़ सकेंगे, बल्कि उन्हें अपनी आंखों के सामने घटित होते हुए महसूस भी कर सकेंगे।
इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी जितेंद्र साहू ने बताया कि पूरे कोरबा जिले में यह पहला सेटअप तैयार किया जा रहा है। इसके माध्यम से स्कूली बच्चों को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए शिक्षा को अधिक रोचक, प्रभावी और अनुभव आधारित बनाया जाएगा। लैब तैयार होने के बाद विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकेंगे। इस पहल से जिले की स्कूली शिक्षा में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
क्या है वर्चुअल रियलिटी लैब?
वर्चुअल रियलिटी यानी आभासी वास्तविकता एक ऐसी आधुनिक तकनीक है, जिसके माध्यम से व्यक्ति कंप्यूटर द्वारा तैयार की गई एक कृत्रिम दुनिया का हिस्सा होने का अनुभव करता है। इसके लिए विशेष प्रकार के VR हेडसेट या चश्मे का इस्तेमाल किया जाता है। इसे पहनते ही विद्यार्थी अपने आसपास की सामान्य कक्षा से अलग एक डिजिटल वातावरण में पहुंच जाते हैं। उन्हें ऐसा महसूस होता है, जैसे वे किसी दूसरे स्थान पर मौजूद हैं और वहां की गतिविधियों को अपनी आंखों से देख रहे हैं।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी विद्यार्थी को सौरमंडल के बारे में पढ़ाया जा रहा है, तो सामान्य कक्षा में उसे ग्रहों और सूर्य के चित्रों के माध्यम से जानकारी दी जाती है। लेकिन VR लैब में वह सूर्य, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति और अन्य ग्रहों को त्रिआयामी (3D) स्वरूप में देख सकेगा। वह अंतरिक्ष में ग्रहों की स्थिति, उनकी गति और सौरमंडल की संरचना को अधिक वास्तविक तरीके से समझ सकेगा।
इसी तरह मानव शरीर की संरचना पढ़ते समय विद्यार्थी शरीर के विभिन्न अंगों, हृदय, मस्तिष्क, फेफड़ों और रक्त संचार प्रणाली को करीब से देखने जैसा अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। इससे कठिन विषयों को समझना आसान हो सकता है।
विज्ञान के प्रयोगों से लेकर अंतरिक्ष की सैर तक
VR लैब की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें विद्यार्थियों को केवल जानकारी नहीं दी जाती, बल्कि उन्हें उस विषय का आभासी अनुभव भी कराया जा सकता है। विज्ञान की पढ़ाई में इसका विशेष महत्व है। विद्यार्थी ज्वालामुखी विस्फोट, पृथ्वी की आंतरिक संरचना, जलचक्र, पर्यावरण, मानव शरीर और विभिन्न वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से समझ सकते हैं।
भूगोल की कक्षा में विद्यार्थी दुनिया के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों, पहाड़ों, समुद्रों, जंगलों और रेगिस्तानों का वर्चुअल भ्रमण कर सकते हैं। जिन स्थानों को देखने के लिए सामान्य परिस्थितियों में लंबी यात्रा करनी पड़ती है, उन्हें डिजिटल तकनीक के माध्यम से कक्षा में ही देखने का अवसर मिल सकता है।
इतिहास के विद्यार्थियों के लिए भी यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। प्राचीन सभ्यताओं, ऐतिहासिक स्मारकों, किलों, महलों और पुरातात्विक स्थलों को त्रिआयामी स्वरूप में देखकर विद्यार्थी इतिहास को अधिक बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
गणित जैसे विषयों में भी VR तकनीक के माध्यम से त्रिआयामी आकृतियों, कोणों, ज्यामितीय संरचनाओं और विभिन्न गणितीय अवधारणाओं को दृश्य रूप में समझाया जा सकता है। इससे उन विद्यार्थियों को विशेष मदद मिलेगी, जिन्हें केवल लिखित उदाहरणों के आधार पर विषय समझने में कठिनाई होती है।
कठिन विषयों को समझना होगा आसान
स्कूलों में कई बार विद्यार्थियों को ऐसे विषय पढ़ाए जाते हैं, जिनकी कल्पना करना उनके लिए कठिन होता है। उदाहरण के लिए परमाणु की संरचना, मानव शरीर के अंदर होने वाली प्रक्रियाएं, ग्रहों की गति, पृथ्वी की बनावट और वैज्ञानिक घटनाएं। सामान्य तौर पर इन विषयों को चित्रों, चार्ट और मॉडल के माध्यम से समझाया जाता है।
VR लैब में इन विषयों को 3D मॉडल और डिजिटल सिमुलेशन के माध्यम से प्रस्तुत किया जा सकता है। इससे विद्यार्थियों को विषय की गहराई समझने में मदद मिलेगी। वे केवल पढ़कर या सुनकर जानकारी याद करने के बजाय उसे देखकर और अनुभव करके सीख सकेंगे।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी विषय को दृश्य और अनुभवात्मक तरीके से समझाया जाता है, तो विद्यार्थियों की जिज्ञासा बढ़ती है और वे पढ़ाई में अधिक रुचि लेते हैं। हालांकि इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि शिक्षक इसका उपयोग पाठ्यक्रम और विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुसार किस तरह करते हैं।
बच्चों में विकसित होगी नई तकनीकी समझ
आज का दौर डिजिटल तकनीक का है। आने वाले समय में शिक्षा, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, अंतरिक्ष विज्ञान और उद्योगों में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल और बढ़ने वाला है। ऐसे में स्कूली स्तर से ही बच्चों को नई तकनीक से परिचित कराना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
VR लैब के माध्यम से विद्यार्थी वर्चुअल रियलिटी, डिजिटल सिमुलेशन और 3D तकनीक जैसी अवधारणाओं से परिचित होंगे। इससे उनमें तकनीक के प्रति रुचि विकसित हो सकती है। साथ ही भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, कंप्यूटर विज्ञान और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए उनकी समझ मजबूत हो सकती है।
यह तकनीक बच्चों में कल्पनाशीलता, जिज्ञासा, अवलोकन क्षमता और समस्या समाधान की क्षमता को विकसित करने में भी सहायक हो सकती है। विद्यार्थी किसी विषय को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखने और समझने का प्रयास करेंगे।
बिना जोखिम के सीखने का मिलेगा अवसर
VR तकनीक का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी है कि इसके माध्यम से कई ऐसी परिस्थितियों का अभ्यास कराया जा सकता है, जिन्हें वास्तविक जीवन में करना कठिन या जोखिम भरा होता है।
उदाहरण के लिए आग लगने की स्थिति में बचाव के तरीके, भूकंप के दौरान सुरक्षा उपाय, सड़क सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन परिस्थितियों में सावधानी बरतने का प्रशिक्षण वर्चुअल वातावरण में दिया जा सकता है। इससे विद्यार्थी वास्तविक जीवन में आने वाली चुनौतियों के प्रति जागरूक हो सकेंगे।
इसी प्रकार विज्ञान के कुछ प्रयोगों को डिजिटल सिमुलेशन के माध्यम से समझाया जा सकता है। हालांकि VR आधारित अभ्यास वास्तविक प्रयोगशाला में किए जाने वाले सभी प्रयोगों का विकल्प नहीं होगा, लेकिन यह उनकी समझ को मजबूत करने में सहायक बन सकता है।
शिक्षक भी बनेंगे आधुनिक शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा
VR लैब केवल विद्यार्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षकों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है। शिक्षक कठिन विषयों को समझाने के लिए डिजिटल सामग्री और वर्चुअल मॉडल का उपयोग कर सकेंगे। इससे कक्षा में पढ़ाई का तरीका अधिक संवादात्मक और रुचिकर बनाया जा सकेगा।
शिक्षक किसी विषय को पढ़ाने से पहले संबंधित वर्चुअल सामग्री का चयन कर विद्यार्थियों को उसके अनुरूप अनुभव करा सकते हैं। इसके बाद कक्षा में उस विषय पर चर्चा, सवाल-जवाब और अभ्यास कराया जा सकता है। इस प्रकार तकनीक और पारंपरिक शिक्षण पद्धति का बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है।
NEP 2020 की भावना के अनुरूप पहल
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विद्यार्थियों को रटने की प्रवृत्ति से बाहर निकालकर अनुभव आधारित, गतिविधि आधारित और कौशल आधारित शिक्षा देने पर जोर दिया गया है। शिक्षा में तकनीक के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया गया है। वर्चुअल रियलिटी लैब इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
नई शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में समझ, रचनात्मकता, तार्किक क्षमता और व्यावहारिक ज्ञान विकसित करना भी है। VR जैसी तकनीक इन उद्देश्यों को हासिल करने में सहायक हो सकती है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा का भी रखना होगा ध्यान
VR लैब का उपयोग करते समय बच्चों की उम्र और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का ध्यान रखना जरूरी होगा। विद्यार्थियों को सीमित समय तक ही VR हेडसेट का इस्तेमाल कराया जाना चाहिए। प्रत्येक उपयोग के बाद उपकरणों की साफ-सफाई, उचित देखरेख और शिक्षक की निगरानी सुनिश्चित करनी होगी। छोटे बच्चों को उनकी उम्र के अनुरूप सामग्री दिखाई जानी चाहिए। साथ ही जिन विद्यार्थियों को VR इस्तेमाल करने में असहजता या चक्कर जैसी परेशानी हो, उनके लिए वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था भी होनी चाहिए।
कोरबा की शिक्षा व्यवस्था में नई शुरुआत
पीएम श्री कोरबा टाउनशिप स्कूल में जिले की पहली वर्चुअल रियलिटी लैब का सेटअप तैयार होना कोरबा की स्कूली शिक्षा के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। इस पहल से विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा। खास बात यह है कि अब बच्चे किताबों में पढ़े जाने वाले विषयों को डिजिटल दुनिया में देखकर समझ सकेंगे।
खंड शिक्षा अधिकारी जितेंद्र साहू के अनुसार, जिले में इस तरह का यह पहला सेटअप है और इसके माध्यम से बच्चों को लाभान्वित करने की तैयारी की जा रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि लैब कब तक पूरी तरह तैयार होकर विद्यार्थियों के लिए शुरू होती है और इसका उपयोग नियमित शिक्षण प्रक्रिया में किस तरह किया जाता है।
यदि इस सुविधा का योजनाबद्ध तरीके से संचालन किया जाता है और शिक्षकों को भी इसका समुचित प्रशिक्षण मिलता है, तो यह पहल कोरबा जिले के विद्यार्थियों के लिए आधुनिक, तकनीक आधारित और अनुभवात्मक शिक्षा के नए रास्ते खोल सकती है। आने वाले समय में यह प्रयोग जिले के अन्य स्कूलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

