कोरबा

दीपावली: अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और समृद्धि का महापर्व

 

जानिए क्यों मनाई जाती है दिवाली, क्या हैं पौराणिक कथाएं और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने की संपूर्ण पूजा विधि

ट्रैक सिटी। दीपों का पर्व दीपावली केवल रोशनी और खुशियों का त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। इस दिन घर-आंगन दीपों से जगमगा उठते हैं, बाजारों में रौनक दिखाई देती है और हर तरफ उत्साह का माहौल रहता है। मान्यता है कि दीपावली पर विधि-विधान से मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और मां सरस्वती की पूजा करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दीपावली क्यों मनाई जाती है? इसके पीछे कौन-कौन सी पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं? पूजा की तैयारी कैसे करनी चाहिए और किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए? आइए जानते हैं दीपावली से जुड़ी हर महत्वपूर्ण बात।

क्यों मनाई जाती है दीपावली?

दीपावली शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- दीप और आवली। दीप का अर्थ है दीपक और आवली का अर्थ है पंक्ति। यानी दीपों की पंक्ति। इसी कारण इस त्योहार को दीपावली कहा जाता है।

हिंदू पंचांग के अनुसार दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। अमावस्या की अंधेरी रात में जब घरों, मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर हजारों दीपक जलते हैं तो पूरा वातावरण प्रकाशमय हो जाता है।

यह पर्व हमें संदेश देता है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयां और अंधकार क्यों न हों, सत्य, सदाचार, ज्ञान और सकारात्मकता के प्रकाश से हर चुनौती का सामना किया जा सकता है। दीपावली बुराई पर अच्छाई, अज्ञान पर ज्ञान और निराशा पर आशा की विजय का प्रतीक है।

दीपावली से जुड़ी प्रमुख पौराणिक कथाएं

1. भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी

दीपावली मनाने के पीछे सबसे प्रसिद्ध मान्यता रामायण से जुड़ी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम ने माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों का वनवास पूरा किया। वनवास के दौरान उन्होंने रावण का वध कर अधर्म का अंत किया और माता सीता को मुक्त कराया।

जब भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे तो उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजा दिया। घरों और रास्तों पर दीपक जलाकर खुशियां मनाई गईं। इसी परंपरा को दीपावली के रूप में मनाए जाने की मान्यता है।

2. समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी का प्राकट्य

एक अन्य प्रमुख धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक अमावस्या के अवसर पर मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। मां लक्ष्मी को धन, वैभव, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। इसी कारण दीपावली की रात मां लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त उनसे अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।

3. भगवान श्रीकृष्ण और नरकासुर का वध

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक अत्याचारी असुर का वध कर हजारों बंदी महिलाओं को मुक्त कराया था। इस विजय की खुशी में दीप जलाकर उत्सव मनाने की परंपरा का संबंध नरक चतुर्दशी से जोड़ा जाता है, जिसे छोटी दीपावली भी कहा जाता है।

4. भगवान महावीर का निर्वाण

जैन धर्म में भी दीपावली का विशेष महत्व है। जैन मान्यता के अनुसार भगवान महावीर ने कार्तिक अमावस्या के दिन निर्वाण प्राप्त किया था। उनके ज्ञान और आध्यात्मिक प्रकाश की स्मृति में दीप जलाए जाते हैं। इस प्रकार दीपावली विभिन्न धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग आध्यात्मिक अर्थ रखती है।

दीपावली की तैयारी कैसे करें?

दीपावली की तैयारी कई दिन पहले से शुरू हो जाती है। इस अवसर पर घरों की साफ-सफाई, रंग-रोगन और सजावट की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि स्वच्छ और व्यवस्थित घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

– घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, रसोई और आंगन की अच्छी तरह सफाई करें।
– मुख्य द्वार पर सुंदर रंगोली बनाएं और शुभ-लाभ तथा स्वास्तिक के चिह्न बनाएं।
– घर के प्रवेश द्वार पर आम के पत्तों या फूलों से तोरण सजाएं।
– पूजा के लिए मिट्टी के दीपक, रुई की बत्ती, घी, तेल, अगरबत्ती और कपूर की व्यवस्था करें।
– मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र को साफ करके पूजा स्थल पर स्थापित करें।
– पूजा के लिए फूल, माला, अक्षत, रोली, चंदन, फल, मिठाई, पंचामृत और नैवेद्य तैयार रखें।
– घर के सभी सदस्यों को पूजा में शामिल करें और जरूरतमंदों की सहायता के लिए भी कुछ व्यवस्था करें।

## कब है दीपावली 2026 और क्या है लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त?

वर्ष 2026 में दीपावली का प्रमुख पर्व रविवार, 8 नवंबर को कार्तिक अमावस्या के अवसर पर मनाया जाएगा। इस दिन प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है।

कोरबा में लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त:

– दिनांक: 8 नवंबर 2026, रविवार
– लक्ष्मी पूजन: शाम 5:43 बजे से 7:41 बजे तक।
– प्रदोष काल: शाम 5:18 बजे से 7:52 बजे तक।
– वृषभ लग्न: शाम 5:43 बजे से 7:41 बजे तक।

पंचांग के अनुसार यह समय लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ माना गया है। हालांकि अलग-अलग पंचांगों और स्थानीय गणनाओं के अनुसार समय में कुछ अंतर हो सकता है। इसलिए अपने क्षेत्र के पुरोहित या स्थानीय पंचांग से भी समय की पुष्टि कर लें।

क्या है मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा विधि?

दीपावली की शाम स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके वहां चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। चौकी पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। साथ में मां सरस्वती और कुबेर देव का स्मरण भी किया जा सकता है।

पूजा की विधि इस प्रकार है:

1. सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करके पूजा प्रारंभ करें। उन्हें विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी आराधना की जाती है।
2. इसके बाद मां लक्ष्मी का आवाहन करें और उन्हें फूल, माला, रोली, अक्षत, चंदन तथा सुगंधित पदार्थ अर्पित करें।
3. मां लक्ष्मी को कमल का फूल, फल, मिठाई और खील-बताशे अर्पित करें।
4. पूजा में धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं।
5. मां लक्ष्मी के मंत्र ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
6. भगवान गणेश के मंत्र ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का जाप करें।
7. इसके बाद लक्ष्मी चालीसा, गणेश चालीसा और लक्ष्मी माता की आरती करें।
8. अंत में परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

पूजा के दौरान घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाएं। परंपरा के अनुसार घर के अलग-अलग हिस्सों में भी दीपक रखे जाते हैं।

किन कार्यों से प्रसन्न होती हैं मां लक्ष्मी?

धार्मिक मान्यताओं में मां लक्ष्मी का निवास स्वच्छता, सदाचार, परिश्रम और सद्भाव से जुड़ा माना गया है। इसलिए केवल दीपावली के दिन पूजा करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि जीवन में अच्छे आचरण को अपनाना भी जरूरी है।

– घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखें।
– माता-पिता, बुजुर्गों और महिलाओं का सम्मान करें।
– जरूरतमंदों, गरीबों और असहाय लोगों की सहायता करें।
– ईमानदारी और मेहनत से धन अर्जित करें।
– घर में प्रेम, शांति और आपसी सहयोग का वातावरण बनाए रखें।
– अन्न, धन और संसाधनों का अपव्यय न करें।
– दीपावली पर गरीब परिवारों के साथ खुशियां और मिठाइयां बांटें।

मान्यता है कि जहां स्वच्छता, परिश्रम, ईमानदारी और सद्भाव होता है, वहां मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

दीपावली के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?

दीपावली खुशियों और सकारात्मकता का पर्व है। इसलिए इस अवसर पर कुछ गलतियों से बचना चाहिए।

– घर में गंदगी और अव्यवस्था न रहने दें।
– किसी व्यक्ति का अपमान, अपशब्द या विवाद न करें।
– नशे और जुए जैसी बुरी आदतों से दूर रहें।
– धन का अनावश्यक प्रदर्शन और फिजूलखर्ची न करें।
– पूजा के दौरान जल्दबाजी या लापरवाही न बरतें।
– जानबूझकर किसी का दिल न दुखाएं।
– पटाखों का अत्यधिक इस्तेमाल न करें और तेज आवाज वाले पटाखों से बचें।
– दीपक जलाते समय पर्दे, कपड़े और ज्वलनशील वस्तुओं को उनसे दूर रखें।
– बच्चों को पटाखे अकेले न जलाने दें।
– पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और प्रसाद का अनादर न करें।

दीपावली का सामाजिक और पर्यावरणीय संदेश

आज दीपावली केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक एकता, आपसी प्रेम और जरूरतमंदों के जीवन में खुशियां लाने का भी अवसर है। इस दिन लोग एक-दूसरे को मिठाइयां और उपहार देकर शुभकामनाएं देते हैं। व्यापारी वर्ग नए बही-खातों का पूजन करता है, वहीं परिवार के लोग एक साथ बैठकर पूजा-अर्चना करते हैं।

बदलते समय में पर्यावरण संरक्षण भी दीपावली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनना चाहिए। मिट्टी के दीपक जलाना, स्थानीय कुम्हारों से दीपक खरीदना, जरूरतमंद परिवारों की सहायता करना और प्रदूषण रहित दीपावली मनाना समाज के लिए बेहतर पहल हो सकती है।

दीपावली केवल एक त्योहार नहीं, जीवन जीने की प्रेरणा है

दीपावली हमें सिखाती है कि वास्तविक समृद्धि केवल धन-दौलत में नहीं, बल्कि परिवार के प्रेम, आपसी विश्वास, अच्छे स्वास्थ्य, सदाचार और दूसरों की सहायता करने की भावना में भी होती है। मां लक्ष्मी की पूजा के साथ भगवान गणेश का स्मरण हमें विवेक और शुभ शुरुआत का संदेश देता है।

इस दीपावली अपने घर को दीपों से रोशन करने के साथ किसी जरूरतमंद के जीवन में भी खुशियों का उजाला लाएं। यही दीपावली का वास्तविक उद्देश्य और भारतीय संस्कृति की सुंदर परंपरा है।

आप सभी को दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश आपके जीवन में सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रकाश फैलाएं।

 

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