सुबह मंदिर खोलने पहुंचे पुजारी तो खुला मिला गेट
सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने कहा- आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
कोरबा (ट्रैक सिटी)। कोरबा शहर में चोरों के हौसले बुलंद हैं। अब चोरों ने सिविल लाइन थाना क्षेत्र के कोसाबाड़ी स्थित हनुमान मंदिर को निशाना बनाया है। रात के अंधेरे में मंदिर का ताला तोड़कर अंदर घुसे अज्ञात चोर हनुमान जी और माता रानी के पास रखी दोनों दानपेटियां से रकम चोरी कर फरार हो गए। दानपेटियों में करीब 50 से 60 हजार रुपये होने का अनुमान लगाया जा रहा है। घटना के बाद क्षेत्र के श्रद्धालुओं में नाराजगी है।
मंदिर के पुजारी सौरभ मिश्र ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे वह रोज की तरह मंदिर खोलने पहुंचे थे। इस दौरान मंदिर का गेट खुला देखकर उन्हें संदेह हुआ। अंदर जाकर देखा तो सामान बिखरा पड़ा था। मंदिर के बाईं ओर स्थित लकड़ी का गेट खुला हुआ था और हनुमान जी के सामने रखा सामान अव्यवस्थित मिला। वहीं माता रानी के पास रखी दानपेटी भी खुली हुई थी। स्थिति देखने के बाद उन्हें आशंका हुई कि चोर दोनों दानपेटियां से रकम लेकर फरार हो गये।
पुजारी के मुताबिक, दानपेटियां आखिरी बार चैत्र माह के नवरात्र में करीब छह महीने पहले खोली गई थीं। इसके बाद से श्रद्धालुओं द्वारा लगातार दान की राशि जमा की जा रही थी। इसी आधार पर दोनों दानपेटियों में लगभग 50 से 60 हजार रुपये होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
सीएसपी बोले- आसपास के कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही
मामले में कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि सिविल लाइन थाना क्षेत्र के कोसाबाड़ी हनुमान मंदिर में चोरी की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुजारी सौरभ मिश्र के आवेदन पर एफआईआर दर्ज की जा रही है। सीएसपी ने बताया कि मंदिर में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं, लेकिन आसपास के क्षेत्रों में लगे कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।
थाने के नजदीक चोरी, रात्रि गश्त पर उठे सवाल
मुख्य मार्ग पर और सिविल लाइन थाने से कुछ ही दूरी पर स्थित मंदिर में चोरी की इस घटना ने पुलिस की रात्रि गश्त व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब शहर के प्रमुख मार्ग और थाने के नजदीक धार्मिक स्थल सुरक्षित नहीं हैं, तो अन्य इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता स्वाभाविक है। अब देखना होगा कि पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों तक कब पहुंचती हैं।

