रायगढ़

छत्तीसगढ़ में बाल संरक्षण की नई मिसाल : रायगढ़ में पहली बार समुदाय-आधारित फोस्टर केयर के तहत बालक को मिला पारिवारिक संरक्षण।

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रायगढ़ (ट्रैक सिटी)/ बच्चों के सर्वाेत्तम हितों की रक्षा और उन्हें सुरक्षित पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले ने एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जिले में पहली बार समुदाय-आधारित फोस्टर केयर (पोषण देखरेख) प्लेसमेंट सफलतापूर्वक संपन्न किया गया, जिसके तहत एक जरूरतमंद बालक को विधिवत उसी समुदाय के एक योग्य फोस्टर पालक परिवार की देखरेख में सौंपा गया।

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यह पहल इसलिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि बालक और फोस्टर पालक दोनों एक ही सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश से जुड़े हैं। इससे बच्चे को न केवल परिवार जैसा स्नेह और सुरक्षा मिलेगी, बल्कि वह अपने समुदाय, संस्कृति और सामाजिक पहचान से भी जुड़ा रहेगा। बाल अधिकारों और बाल संरक्षण के क्षेत्र में इसे एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम माना जा रहा है।

इस ऐतिहासिक प्लेसमेंट प्रक्रिया को जिला बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) रायगढ़ के मार्गदर्शन में पूर्ण किया गया। समिति के अध्यक्ष गेवेश नायक तथा सदस्यों लक्ष्मी प्रसाद पटेल, निवेदिता पटनायक एवं रूपलाल चौहान ने मामले का विस्तृत परीक्षण कर सभी आवश्यक दस्तावेजों और विधिक प्रावधानों का सत्यापन किया तथा फोस्टर केयर प्लेसमेंट को स्वीकृति प्रदान की।

जिला कार्यक्रम अधिकारी एल.आर. कच्छप के निर्देशन और जिला बाल संरक्षण अधिकारी धीरेन्द्र शर्मा के मार्गदर्शन में जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी एवं नियमानुसार संपन्न कराया गया। प्रारंभिक प्रयास ऑनलाइन माध्यम से किए गए, किंतु तकनीकी एवं सर्वर संबंधी बाधाओं के कारण प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकी। ऐसे में बालक के सर्वाेत्तम हित को सर्वाेपरि रखते हुए निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुसार फॉर्म-32 के माध्यम से ऑफलाइन प्रक्रिया पूरी कर बालक को पोषण देखरेख में सौंपा गया।

इस अवसर पर विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों सहित खुशीराम साहू, दूबीश्याम खड़िया, किरण मेहर एवं सविता साव (सीईएसी) की सक्रिय सहभागिता रही। गृह सत्यापन, दस्तावेजीकरण और समन्वय में उनके योगदान ने इस पूरी प्रक्रिया को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

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