जय जोहार, जय छत्तीसगढ़!
छत्तीसगढ़ केवल एक भौगोलिक क्षेत्र या प्रशासनिक इकाई नहीं है, बल्कि यह अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गौरवशाली इतिहास, जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक संपदा, खनिज संसाधनों और विशिष्ट पहचान वाला राज्य है। यहां की मिट्टी में वीरता, त्याग, स्वाभिमान, लोककला और सामाजिक समरसता की परंपरा सदियों से जीवित है।
1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ भारत के 26वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। अलग राज्य बनाने की मांग के पीछे क्षेत्रीय पहचान, प्रशासनिक सुविधा, स्थानीय संसाधनों पर अधिकार, आर्थिक विकास और छत्तीसगढ़ी भाषा-संस्कृति को उचित सम्मान दिलाने की भावना प्रमुख थी।
राज्य गठन के बाद पिछले 26 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, सिंचाई, संचार, नगरीय विकास और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। हालांकि विकास के साथ-साथ विस्थापन, बेरोजगारी, पर्यावरण संरक्षण, क्षेत्रीय असमानता और आदिवासी अंचलों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं।
यह लेख छत्तीसगढ़ के इतिहास से लेकर राज्य निर्माण, भौगोलिक विशेषताओं, विकास यात्रा और अब तक राज्य का नेतृत्व करने वाले मुख्यमंत्रियों एवं राज्यपालों का क्रमबद्ध परिचय प्रस्तुत करता है।
छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास और नामकरण
छत्तीसगढ़ का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस क्षेत्र को पहले दक्षिण कौशल (दक्षिण कोसल) के नाम से जाना जाता था। रामायण और अन्य प्राचीन ग्रंथों में भी दक्षिण कोसल का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम का संबंध माता कौशल्या के मायके दक्षिण कौशल से रहा है।
इतिहासकारों के अनुसार चौथी शताब्दी से इस क्षेत्र का राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है। यहां विभिन्न समयों में शरभपुरीय, पांडुवंशी, सोमवंशी, कलचुरी और नागवंशी शासकों का प्रभाव रहा।
कलचुरी राजवंश ने रतनपुर को अपनी प्रमुख राजधानी बनाया। इस क्षेत्र में लगभग 750 ईस्वी के आसपास हैहयवंशी कलचुरियों का प्रभाव स्थापित हुआ। रतनपुर, मल्हार, सिरपुर और अरंग जैसे स्थान ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
छत्तीसगढ़ नाम की उत्पत्ति: प्रचलित मान्यता के अनुसार छत्तीसगढ़ का अर्थ 36 गढ़ अर्थात 36 किलों वाला क्षेत्र है। पुराने समय में यहां अनेक गढ़ और रियासतें थीं। हालांकि 36 गढ़ों की संख्या को लेकर इतिहासकारों में अलग-अलग मत हैं। यह नाम धीरे-धीरे इस पूरे क्षेत्र की पहचान बन गया।
ब्रिटिश शासन के दौरान यह क्षेत्र विभिन्न रियासतों और प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित था। स्वतंत्रता के बाद यह मध्य प्रदेश का हिस्सा बना। 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश के गठन के साथ छत्तीसगढ़ क्षेत्र भी उसी राज्य में शामिल हो गया।
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का सपना और आंदोलन
छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाने का सपना किसी एक व्यक्ति का नहीं था। यह कई पीढ़ियों के सामाजिक कार्यकर्ताओं, साहित्यकारों, राजनेताओं, बुद्धिजीवियों और क्षेत्रीय नेतृत्व के संघर्ष का परिणाम था।
अलग राज्य की मांग के पीछे प्रमुख कारण थे:
* छत्तीसगढ़ की विशिष्ट भाषा, संस्कृति और सामाजिक पहचान।
* स्थानीय प्राकृतिक एवं खनिज संसाधनों का उचित लाभ स्थानीय जनता तक पहुंचाना।
* आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों का स्वतंत्र प्रशासनिक विकास।
* शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और रोजगार के अवसरों में वृद्धि।
* भोपाल स्थित प्रशासन से दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान में होने वाली कठिनाइयां।
राज्य निर्माण के प्रमुख स्वप्नदृष्टा एवं योगदानकर्ता
* पंडित सुंदरलाल शर्मा: छत्तीसगढ़ में सामाजिक जागरण, शिक्षा, स्वतंत्रता आंदोलन और जनचेतना के प्रमुख अग्रदूतों में गिने जाते हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ का गांधी भी कहा जाता है।
* ठाकुर प्यारेलाल सिंह: श्रमिक आंदोलन, सहकारिता और सामाजिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले प्रमुख जननेता थे। उन्होंने क्षेत्रीय चेतना को मजबूत किया।
* डॉ. खूबचंद बघेल: छत्तीसगढ़ की अलग पहचान और पृथक राज्य की मांग को वैचारिक एवं राजनीतिक आधार देने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल थे। उन्होंने छत्तीसगढ़ी अस्मिता के लिए आजीवन प्रयास किए।
* छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण मंच और क्षेत्रीय संगठन: अलग-अलग समय पर अनेक संगठनों ने पृथक राज्य की मांग को जनआंदोलन का स्वरूप दिया।
* क्षेत्रीय राजनीतिक नेतृत्व: 1990 के दशक में पृथक राज्य की मांग राजनीतिक दलों के चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हुई। वर्ष 1996 और 1998 के चुनावों में भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण रहा।
यह समझना जरूरी है कि छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किसी एक नेता की उपलब्धि नहीं, बल्कि लंबे सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रयासों का सामूहिक परिणाम था।
छत्तीसगढ़ राज्य का गठन कैसे हुआ?
भारत में वर्ष 2000 में तीन नए राज्यों के निर्माण का महत्वपूर्ण दौर आया। उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड, बिहार से झारखंड और मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ का गठन हुआ।
छत्तीसगढ़ के निर्माण की संवैधानिक प्रक्रिया इस प्रकार पूरी हुई:
* वर्ष 1998 में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की मांग को राजनीतिक समर्थन मिला।
* अगस्त 2000 में संसद में मध्य प्रदेश पुनर्गठन विधेयक पारित हुआ।
* 25 अगस्त 2000 को तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 को स्वीकृति प्रदान की।
* 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ आधिकारिक रूप से भारत का 26वां राज्य बना।
इस अधिनियम के तहत तत्कालीन मध्य प्रदेश के 16 जिलों को मिलाकर छत्तीसगढ़ राज्य बनाया गया। रायपुर को राजधानी बनाया गया।
राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजीत जोगी ने शपथ ली। प्रथम राज्यपाल के रूप में दिनेश नंदन सहाय ने जिम्मेदारी संभाली।
छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति एवं प्राकृतिक संपदा
छत्तीसगढ़ भारत के मध्य-पूर्वी हिस्से में स्थित है। इसका भौगोलिक विस्तार लगभग 1.35 लाख वर्ग किलोमीटर है। यह राज्य प्राकृतिक विविधता, जंगलों, पहाड़ियों, नदियों, पठारों और खनिज संपदा के लिए प्रसिद्ध है।
सीमावर्ती राज्य
छत्तीसगढ़ की सीमा छह राज्यों से लगती है:
* उत्तर में उत्तर प्रदेश।
* उत्तर-पूर्व में झारखंड।
* पूर्व में ओडिशा।
* दक्षिण में तेलंगाना।
* दक्षिण-पश्चिम में महाराष्ट्र।
* पश्चिम और उत्तर-पश्चिम में मध्य प्रदेश।
प्रमुख भौगोलिक क्षेत्र
छत्तीसगढ़ को सामान्यतः तीन प्रमुख प्राकृतिक क्षेत्रों में बांटा जाता है:
* छत्तीसगढ़ का मैदानी क्षेत्र – रायपुर, दुर्ग, धमतरी, महासमुंद, बिलासपुर और आसपास के इलाके। यह कृषि और धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
* बस्तर का पठारी क्षेत्र – दक्षिण छत्तीसगढ़ का वनाच्छादित और पहाड़ी क्षेत्र, जहां आदिवासी संस्कृति और जैव विविधता की विशेष पहचान है।
* उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र – सरगुजा, जशपुर, कोरिया और बलरामपुर के आसपास के इलाके, जहां पहाड़, जंगल और पठारी भूभाग मिलते हैं।
प्रमुख नदियां
महानदी राज्य की प्रमुख नदी है। इसके अतिरिक्त शिवनाथ, हसदेव, इंद्रावती, अरपा, पैरी, केलो, खारून, जोंक और मांड प्रमुख नदियां हैं।
प्राकृतिक एवं खनिज संपदा
छत्तीसगढ़ को खनिज संपदा की दृष्टि से देश के महत्वपूर्ण राज्यों में गिना जाता है। यहां कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूना पत्थर, टिन अयस्क और डोलोमाइट के भंडार हैं।
कोरबा को देश की प्रमुख ऊर्जा उत्पादन नगरी के रूप में पहचान मिली है। बैलाडीला की लौह अयस्क खदानें, कोरबा की कोयला खदानें और बालोद, दंतेवाड़ा, रायगढ़ एवं सरगुजा के खनिज क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
वन संपदा में साल, सागौन, बीजा, महुआ, तेंदूपत्ता, हर्रा, बहेरा और आंवला प्रमुख हैं। राज्य में वन आधारित आजीविका लाखों ग्रामीण एवं आदिवासी परिवारों से जुड़ी हुई है।
छत्तीसगढ़ की भाषा, संस्कृति और परंपरा
छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी लोकसंस्कृति से है। यहां छत्तीसगढ़ी प्रमुख क्षेत्रीय भाषा है। इसके अलावा गोंडी, हल्बी, कुड़ुख, सरगुजिहा, भतरी और अन्य स्थानीय भाषाएं एवं बोलियां प्रचलित हैं।
राज्य की प्रमुख सांस्कृतिक विशेषताएं हैं:
* पंथी नृत्य – सतनामी समाज की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा।
* राउत नाचा – यादव समाज की पारंपरिक लोकनृत्य शैली।
* सुआ नृत्य – महिलाओं द्वारा किया जाने वाला पारंपरिक नृत्य।
* करमा नृत्य – आदिवासी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा।
* पंडवानी – महाभारत की कथाओं पर आधारित विश्वविख्यात लोकगायन शैली।
* भरथरी गायन – लोकगाथाओं की समृद्ध परंपरा।
हरेली, तीजा, पोला, छेरछेरा, बस्तर दशहरा, मड़ई और गौरा-गौरी जैसे पर्व यहां की सामाजिक एकता और परंपरा के प्रतीक हैं।

