कोरबा

जंगल की आग जैसा लाल … पर जंगलवासियों की जिंदगी में उजियारा भरने वाला- पलाश का फूल।

कटघोरा वनमंडल ने पलाश फूलों की खरीदी कर बढ़ाया आजीविका का आधार।

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कोरबा(ट्रैक सिटी)/ बसंत की हल्की आहट के साथ ही जब हवा में एक अलग-सी सुगंध घुलने लगती है, तब जंगलों का रंग अचानक बदल जाता है। हरियाली के बीच एक तेज, चमकदार नारंगी-लाल रंग उभरता है,यह है पलाश। जिसे लोग ढाक, टेसू या फ्लेम आफ दी फारेस्ट के नाम से जानते हैं। दूर से निहारें तो ऐसा प्रतीत होता है मानो जंगल सचमुच आग की लपटों में सिमटकर भी मुस्कुरा रहा हो। पर पलाश केवल एक सुंदर दृश्य नहीं है। यह छत्तीसगढ़ के आदिवासी जीवन की धड़कन है, रोजगार का साधन, परंपरा का हिस्सा, औषधि का स्रोत और आत्मसम्मान की पहचान।

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कोरबा के जंगलों में पलाश की अपनी अलग ही छटा है। जब इसका मौसम आता है, तो ये फूल पेड़ों पर ही नहीं, जमीन पर भी बिखरकर प्रकृति की रंगोली रच देते हैं। जहां-जहां ये खिलते हैं, वहां सिर्फ सुंदरता नहीं, बल्कि संभावनाएं भी जन्म लेती हैं। अब पलाश केवल जंगल की शोभा नहीं रहा, बल्कि जंगल वासियों के जीवन में उजाला भरने वाला माध्यम बन चुका है। हर बसंत के साथ जब ये फूल खिलते हैं, तो उनके साथ ही खिलती है नई उम्मीद, नई कमाई और बेहतर भविष्य की एक नई कहानी।

कटघोरा वनमंडल के पसान, केन्दई, जटगा, एतमानगर, चैतमा और पाली क्षेत्र में पलाश के वृक्ष प्रकृति के अनमोल उपहार की तरह मौजूद हैं। मार्च-अप्रैल आते ही जब ये फूल झरने लगते हैं, तो आदिवासी परिवार सुबह-सुबह जंगल की राह पकड़ लेते हैं। हाथों में टोकरी और मन में उम्मीद लिए वे एक-एक फूल चुनते हैं-मानो अपने जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को समेट रहे हों।

पलाश के फूल केवल रंग और सुंदरता तक सीमित नहीं हैं। इनके औषधीय गुण, प्राकृतिक होली रंग के रूप में उपयोग और बाजार में बढ़ती मांग ने इन्हें आज एक मजबूत आजीविका का साधन बना दिया है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ, रायपुर द्वारा वर्ष 2025 में इसका संग्रहण दर 11.50 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया, जिससे संग्राहकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिलने लगा है। समय के साथ इसकी कीमत में भी निरंतर वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में जहां इसका क्रय मूल्य 900 रुपये प्रति क्विंटल था, वहीं वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 1150 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। संघ मुख्यालय रायपुर द्वारा इसे टेंडर के माध्यम से 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से विक्रय किया गया, जो इसकी बढ़ती आर्थिक उपयोगिता को दर्शाता है।

कटघोरा वनमंडल अधिकारी कुमार निशांत के अनुसार, वन धन विकास केंद्र -पसान, मोरगा, डोंगानाला, गुरसिया और मानिकपुर के माध्यम से पलाश फूलों का संग्रहण व्यवस्थित रूप से किया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में संग्राहकों की संख्या और संग्रहण की मात्रा में उतार-चढ़ाव जरूर देखने को मिला है, लेकिन प्रयास लगातार जारी हैं। वर्ष 2022-23 में 116 संग्राहकों द्वारा 402 क्विंटल, वर्ष 2023-24 में 40 संग्राहकों द्वारा 58 क्विंटल, वर्ष 2024-25 में 107 संग्राहकों द्वारा 147 क्विंटल तथा वर्ष 2025-26 में 20 संग्राहकों द्वारा 76 क्विंटल पलाश फूल संग्रहित किए गए। वर्ष 2025-26 में संग्राहकों को कुल 87,400 रुपये का भुगतान किया गया, जो उनके जीवनयापन में महत्वपूर्ण सहारा बना।

आगामी सीजन को लेकर वनमंडल की सभी समितियां सक्रिय हो गई हैं। अधिक से अधिक ग्रामीणों को इससे जोड़ने और संग्रहण बढ़ाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार की योजना बनाई जा रही है, ताकि पलाश के इन फूलों से आदिवासी परिवारों की आय में और वृद्धि हो सके।

पलाश अब केवल जंगल में खिलने वाला फूल नहीं है-यह उम्मीद का रंग है, श्रम का सम्मान है और आत्मनिर्भरता की एक सशक्त कहानी है। जब अगली बार बसंत आएगा और पलाश खिलेगा, तब वह केवल जंगल को नहीं, बल्कि कई जिंदगियों को रोशन करता नजर आएगा।

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