शरद पूर्णिमा पर सात गांवों के ग्रामीणों ने साझा की खुशी, वन विभाग ने पहल को बताया प्रेरणादायक
कोरबा (ट्रैक सिटी)। कोरबा वनमंडल के करतला वन परिक्षेत्र अंतर्गत साजापानी क्षेत्र में नन्हे हाथी के जन्म की खुशी में शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर छठी का सामुदायिक आयोजन किया गया। दशहरे के दिन 20 अक्टूबर को जन्मे नन्हे हाथी के आगमन को ग्रामीणों ने उत्सव के रूप में मनाया। इस पहल के माध्यम से साजापानी सहित आसपास के सात गांवों के ग्रामीणों ने वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और मानव-हाथी सह-अस्तित्व का प्रेरणादायक संदेश दिया।
आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी को लेकर भय और चिंता का माहौल देखने को मिलता है। फसलों, घरों और जान-माल की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों की चिंताएं भी सामने आती रहती हैं। ऐसे माहौल में नन्हे हाथी के जन्म को खुशी के अवसर के रूप में मनाना एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है। ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि हाथी केवल जंगलों में रहने वाले वन्यजीव नहीं, बल्कि प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनका संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है।
सात गांवों की भागीदारी ने दिया सकारात्मक संदेश
साजापानी और आसपास के गांवों के लोगों ने नन्हे हाथी के जन्म की खुशी साझा कर वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी भावनात्मक जुड़ाव को प्रदर्शित किया। इस आयोजन ने यह भी रेखांकित किया कि जनभागीदारी और जागरूकता के माध्यम से मनुष्य तथा वन्यजीवों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकता है। ग्रामीणों की यह पहल दूसरे गांवों के लोगों को भी हाथियों के संरक्षण और सुरक्षित सह-अस्तित्व के लिए प्रेरित कर सकती है।
वन विभाग ने ग्रामीणों की पहल को सराहा
कार्यक्रम में उपवनमंडलाधिकारी मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों के आमंत्रण पर सहभागिता की और इस संवेदनशील पहल के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि साजापानी के ग्रामीणों ने हाथियों के प्रति अपनत्व और सह-अस्तित्व की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। यदि दूसरे गांवों के लोग भी वन विभाग के साथ मिलकर सहयोग करें, तो मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को कम करने और ग्रामीणों के साथ हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
हाथियों की निगरानी और ग्रामीणों को सतर्क करने के प्रयास
उपवनमंडलाधिकारी ने बताया कि वन विभाग द्वारा हाथियों की गतिविधियों पर नियमित नजर रखी जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में रात्रिकालीन गश्त की जाती है। हाथियों की मौजूदगी की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए मुनादी और व्हाट्सएप समूहों का सहारा लिया जाता है, ताकि लोग समय रहते सतर्क हो सकें और किसी अप्रिय घटना की आशंका को कम किया जा सके।
ग्रामीणों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने, उनके नजदीक नहीं जाने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना देने की समझाइश भी दी जाती है। हाथियों को घेरने, उकसाने या उनके रास्ते में बाधा डालने जैसी गतिविधियों से बचना भी जरूरी है।
संरक्षण के साथ सुरक्षा भी प्राथमिकता
वन विभाग का उद्देश्य जनसहयोग और आपसी समन्वय के माध्यम से मानव-हाथी संघर्ष को कम करना है, ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और ग्रामीणों की जान-माल दोनों की सुरक्षा हो सके। साजापानी के ग्रामीणों की पहल इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों की गतिविधियों की जानकारी समय पर साझा करें, सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करें और वन्यजीव संरक्षण में सक्रिय सहयोग दें। नन्हे हाथी के जन्म पर आयोजित छठी ने यह संदेश दिया कि संवेदनशीलता, जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से मनुष्य और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत बनाया जा सकता है।
मांदर-मंजीरे की थाप पर पारंपरिक करमा नृत्य ने बांधा समां
साजापानी में नन्हे हाथी के जन्म की खुशी में आयोजित छठी समारोह के दौरान शाम को पारंपरिक लोक संस्कृति की मनमोहक छटा देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में सजे ग्रामीणों ने मांदर और मंजीरे की थाप पर करमा नृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया। लोकगीतों और पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति से पूरा माहौल उत्सवमय हो उठा। ग्रामीणों ने नन्हे हाथी के जन्म की खुशी को सामूहिक उत्सव के रूप में मनाते हुए अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और प्रकृति के प्रति जुड़ाव को भी प्रदर्शित किया। आयोजन ने वन्यजीव संरक्षण के संदेश के साथ ग्रामीण संस्कृति और सामुदायिक एकजुटता की सुंदर झलक पेश की।
संदेश: हाथियों के प्रति संवेदनशीलता, वन्यजीवों का संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा—मानव-हाथी सह-अस्तित्व हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
