कोरबा

नन्हे हाथी की छठी मनाकर ग्रामीणों ने पेश की मानव-हाथी सह-अस्तित्व की मिसाल

शरद पूर्णिमा पर सात गांवों के ग्रामीणों ने साझा की खुशी, मांदर-मंजीरे की थाप पर पारंपरिक करमा नृत्य ने बांधा समां

शरद पूर्णिमा पर सात गांवों के ग्रामीणों ने साझा की खुशी, मांदर-मंजीरे की थाप पर पारंपरिक करमा नृत्य ने बांधा समां

कोरबा (ट्रैक सिटी)। कोरबा वनमंडल के करतला वन परिक्षेत्र अंतर्गत साजापानी क्षेत्र में नन्हे हाथी के जन्म की खुशी में शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर छठी का सामुदायिक आयोजन किया गया। दशहरे के दिन 20 अक्टूबर 2026 को जन्मे नन्हे हाथी की खुशी में ग्रामीणों ने उत्सव मनाकर मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व की प्रेरणादायक मिसाल पेश की। इस आयोजन में आसपास के सात गांवों के ग्रामीण शामिल हुए और वन्यजीवों के प्रति अपनत्व एवं संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम का आयोजन माँ काशीरानी मंदिर के नीचे गौठान, टिकरापारा में किया गया। इसमें रामभाठा, लबेद, पहाड़गांव, काशीपानी, छातापाठ, जामपानी और साजापानी के ग्रामीणों ने सहभागिता की। नन्हे हाथी के जन्म की खुशी साझा करने के लिए जुटे ग्रामीणों ने इस अवसर को सामुदायिक उत्सव का रूप दिया।

मांदर-मंजीरे की थाप पर करमा नृत्य ने बांधा समां

शाम होते ही आयोजन स्थल पर पारंपरिक लोक संस्कृति की मनमोहक छटा देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में सजे ग्रामीणों ने मांदर और मंजीरे की थाप पर करमा नृत्य प्रस्तुत किया। लोकगीतों और पारंपरिक नृत्य से पूरा माहौल उत्सवमय हो उठा। इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने ग्रामीण परंपराओं, आपसी एकजुटता और प्रकृति के प्रति लोगों के जुड़ाव को दर्शाया। नन्हे हाथी के जन्म की खुशी में आयोजित इस कार्यक्रम ने वन्यजीव संरक्षण के साथ क्षेत्र की लोक संस्कृति को भी प्रमुखता से सामने रखा।

वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता की अनूठी पहल

आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी से फसलों, घरों और जान-माल की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। ऐसे में नन्हे हाथी के जन्म को खुशी के अवसर के रूप में मनाना एक सकारात्मक पहल है। ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि हाथी हमारी प्राकृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनका संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है। जनभागीदारी और जागरूकता के माध्यम से मानव-हाथी सह-अस्तित्व को मजबूत किया जा सकता है।

 

उप-वनमंडलाधिकारी मणिकांत वर्मा ने की सहभागिता

कार्यक्रम में उप-वनमंडलाधिकारी मणिकांत वर्मा ग्रामीणों के आमंत्रण पर शामिल हुए। उन्होंने इस संवेदनशील पहल के लिए ग्रामीणों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि साजापानी क्षेत्र के लोगों ने हाथियों के प्रति लगाव और सह-अस्तित्व की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अन्य गांवों के ग्रामीण भी इसी तरह वन विभाग के साथ सहयोग करेंगे, जिससे मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी और ग्रामीणों तथा वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

हाथियों की निगरानी और सुरक्षा के लिए वन विभाग सतर्क

उप-वनमंडलाधिकारी ने बताया कि वन विभाग हाथियों की गतिविधियों पर नियमित निगरानी रख रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में रात्रिकालीन गश्त की जाती है। मुनादी और व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से हाथियों की मौजूदगी की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाई जाती है, ताकि लोग समय रहते सतर्क हो सकें।

ग्रामीणों को हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने, उनके नजदीक नहीं जाने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना देने की समझाइश दी जाती है। वन विभाग का प्रयास है कि ग्रामीणों के सहयोग और आपसी समन्वय से मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को कम किया जाए तथा ग्रामीणों की जान-माल और वन्यजीवों, दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

साजापानी के ग्रामीणों की यह पहल दूसरे गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत है। नन्हे हाथी की छठी के बहाने ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता, सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान और सामूहिक सहभागिता प्रकृति के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

संदेश: हाथियों के प्रति संवेदनशीलता, वन्यजीवों का संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा—मानव-हाथी सह-अस्तित्व हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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