विशेष लेख

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस : इतिहास, भूगोल, विकास यात्रा, निर्माता, मुख्यमंत्री एवं राज्यपालों का संपूर्ण परिचय

 

जय जोहार, जय छत्तीसगढ़!

छत्तीसगढ़ केवल एक भौगोलिक क्षेत्र या प्रशासनिक इकाई नहीं है, बल्कि यह अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गौरवशाली इतिहास, जनजातीय परंपराओं, प्राकृतिक संपदा, खनिज संसाधनों और विशिष्ट पहचान वाला राज्य है। यहां की मिट्टी में वीरता, त्याग, स्वाभिमान, लोककला और सामाजिक समरसता की परंपरा सदियों से जीवित है।

1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ भारत के 26वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। अलग राज्य बनाने की मांग के पीछे क्षेत्रीय पहचान, प्रशासनिक सुविधा, स्थानीय संसाधनों पर अधिकार, आर्थिक विकास और छत्तीसगढ़ी भाषा-संस्कृति को उचित सम्मान दिलाने की भावना प्रमुख थी।

राज्य गठन के बाद पिछले 26 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, सिंचाई, संचार, नगरीय विकास और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। हालांकि विकास के साथ-साथ विस्थापन, बेरोजगारी, पर्यावरण संरक्षण, क्षेत्रीय असमानता और आदिवासी अंचलों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं।

यह लेख छत्तीसगढ़ के इतिहास से लेकर राज्य निर्माण, भौगोलिक विशेषताओं, विकास यात्रा और अब तक राज्य का नेतृत्व करने वाले मुख्यमंत्रियों एवं राज्यपालों का क्रमबद्ध परिचय प्रस्तुत करता है।

छत्तीसगढ़ का प्राचीन इतिहास और नामकरण

छत्तीसगढ़ का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस क्षेत्र को पहले दक्षिण कौशल (दक्षिण कोसल) के नाम से जाना जाता था। रामायण और अन्य प्राचीन ग्रंथों में भी दक्षिण कोसल का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम का संबंध माता कौशल्या के मायके दक्षिण कौशल से रहा है।

इतिहासकारों के अनुसार चौथी शताब्दी से इस क्षेत्र का राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है। यहां विभिन्न समयों में शरभपुरीय, पांडुवंशी, सोमवंशी, कलचुरी और नागवंशी शासकों का प्रभाव रहा।

कलचुरी राजवंश ने रतनपुर को अपनी प्रमुख राजधानी बनाया। इस क्षेत्र में लगभग 750 ईस्वी के आसपास हैहयवंशी कलचुरियों का प्रभाव स्थापित हुआ। रतनपुर, मल्हार, सिरपुर और अरंग जैसे स्थान ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

छत्तीसगढ़ नाम की उत्पत्ति: प्रचलित मान्यता के अनुसार छत्तीसगढ़ का अर्थ 36 गढ़ अर्थात 36 किलों वाला क्षेत्र है। पुराने समय में यहां अनेक गढ़ और रियासतें थीं। हालांकि 36 गढ़ों की संख्या को लेकर इतिहासकारों में अलग-अलग मत हैं। यह नाम धीरे-धीरे इस पूरे क्षेत्र की पहचान बन गया।

ब्रिटिश शासन के दौरान यह क्षेत्र विभिन्न रियासतों और प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित था। स्वतंत्रता के बाद यह मध्य प्रदेश का हिस्सा बना। 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश के गठन के साथ छत्तीसगढ़ क्षेत्र भी उसी राज्य में शामिल हो गया।

छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का सपना और आंदोलन

छत्तीसगढ़ को अलग राज्य बनाने का सपना किसी एक व्यक्ति का नहीं था। यह कई पीढ़ियों के सामाजिक कार्यकर्ताओं, साहित्यकारों, राजनेताओं, बुद्धिजीवियों और क्षेत्रीय नेतृत्व के संघर्ष का परिणाम था।

अलग राज्य की मांग के पीछे प्रमुख कारण थे:

* छत्तीसगढ़ की विशिष्ट भाषा, संस्कृति और सामाजिक पहचान।

* स्थानीय प्राकृतिक एवं खनिज संसाधनों का उचित लाभ स्थानीय जनता तक पहुंचाना।

* आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों का स्वतंत्र प्रशासनिक विकास।

* शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और रोजगार के अवसरों में वृद्धि।

* भोपाल स्थित प्रशासन से दूरस्थ क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान में होने वाली कठिनाइयां।

राज्य निर्माण के प्रमुख स्वप्नदृष्टा एवं योगदानकर्ता

* पंडित सुंदरलाल शर्मा: छत्तीसगढ़ में सामाजिक जागरण, शिक्षा, स्वतंत्रता आंदोलन और जनचेतना के प्रमुख अग्रदूतों में गिने जाते हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ का गांधी भी कहा जाता है।

* ठाकुर प्यारेलाल सिंह: श्रमिक आंदोलन, सहकारिता और सामाजिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले प्रमुख जननेता थे। उन्होंने क्षेत्रीय चेतना को मजबूत किया।

* डॉ. खूबचंद बघेल: छत्तीसगढ़ की अलग पहचान और पृथक राज्य की मांग को वैचारिक एवं राजनीतिक आधार देने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल थे। उन्होंने छत्तीसगढ़ी अस्मिता के लिए आजीवन प्रयास किए।

* छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण मंच और क्षेत्रीय संगठन: अलग-अलग समय पर अनेक संगठनों ने पृथक राज्य की मांग को जनआंदोलन का स्वरूप दिया।

* क्षेत्रीय राजनीतिक नेतृत्व: 1990 के दशक में पृथक राज्य की मांग राजनीतिक दलों के चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से शामिल हुई। वर्ष 1996 और 1998 के चुनावों में भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण रहा।

यह समझना जरूरी है कि छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किसी एक नेता की उपलब्धि नहीं, बल्कि लंबे सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रयासों का सामूहिक परिणाम था।

छत्तीसगढ़ राज्य का गठन कैसे हुआ?

भारत में वर्ष 2000 में तीन नए राज्यों के निर्माण का महत्वपूर्ण दौर आया। उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड, बिहार से झारखंड और मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ का गठन हुआ।

छत्तीसगढ़ के निर्माण की संवैधानिक प्रक्रिया इस प्रकार पूरी हुई:

* वर्ष 1998 में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की मांग को राजनीतिक समर्थन मिला।

* अगस्त 2000 में संसद में मध्य प्रदेश पुनर्गठन विधेयक पारित हुआ।

* 25 अगस्त 2000 को तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2000 को स्वीकृति प्रदान की।

* 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ आधिकारिक रूप से भारत का 26वां राज्य बना।

इस अधिनियम के तहत तत्कालीन मध्य प्रदेश के 16 जिलों को मिलाकर छत्तीसगढ़ राज्य बनाया गया। रायपुर को राजधानी बनाया गया।

राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजीत जोगी ने शपथ ली। प्रथम राज्यपाल के रूप में दिनेश नंदन सहाय ने जिम्मेदारी संभाली।

छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति एवं प्राकृतिक संपदा

छत्तीसगढ़ भारत के मध्य-पूर्वी हिस्से में स्थित है। इसका भौगोलिक विस्तार लगभग 1.35 लाख वर्ग किलोमीटर है। यह राज्य प्राकृतिक विविधता, जंगलों, पहाड़ियों, नदियों, पठारों और खनिज संपदा के लिए प्रसिद्ध है।

सीमावर्ती राज्य

छत्तीसगढ़ की सीमा छह राज्यों से लगती है:

* उत्तर में उत्तर प्रदेश।

* उत्तर-पूर्व में झारखंड।

* पूर्व में ओडिशा।

* दक्षिण में तेलंगाना।

* दक्षिण-पश्चिम में महाराष्ट्र।

* पश्चिम और उत्तर-पश्चिम में मध्य प्रदेश।

प्रमुख भौगोलिक क्षेत्र

छत्तीसगढ़ को सामान्यतः तीन प्रमुख प्राकृतिक क्षेत्रों में बांटा जाता है:

* छत्तीसगढ़ का मैदानी क्षेत्र – रायपुर, दुर्ग, धमतरी, महासमुंद, बिलासपुर और आसपास के इलाके। यह कृषि और धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।

* बस्तर का पठारी क्षेत्र – दक्षिण छत्तीसगढ़ का वनाच्छादित और पहाड़ी क्षेत्र, जहां आदिवासी संस्कृति और जैव विविधता की विशेष पहचान है।

* उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र – सरगुजा, जशपुर, कोरिया और बलरामपुर के आसपास के इलाके, जहां पहाड़, जंगल और पठारी भूभाग मिलते हैं।

प्रमुख नदियां

महानदी राज्य की प्रमुख नदी है। इसके अतिरिक्त शिवनाथ, हसदेव, इंद्रावती, अरपा, पैरी, केलो, खारून, जोंक और मांड प्रमुख नदियां हैं।

प्राकृतिक एवं खनिज संपदा

छत्तीसगढ़ को खनिज संपदा की दृष्टि से देश के महत्वपूर्ण राज्यों में गिना जाता है। यहां कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, चूना पत्थर, टिन अयस्क और डोलोमाइट के भंडार हैं।

कोरबा को देश की प्रमुख ऊर्जा उत्पादन नगरी के रूप में पहचान मिली है। बैलाडीला की लौह अयस्क खदानें, कोरबा की कोयला खदानें और बालोद, दंतेवाड़ा, रायगढ़ एवं सरगुजा के खनिज क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

वन संपदा में साल, सागौन, बीजा, महुआ, तेंदूपत्ता, हर्रा, बहेरा और आंवला प्रमुख हैं। राज्य में वन आधारित आजीविका लाखों ग्रामीण एवं आदिवासी परिवारों से जुड़ी हुई है।

छत्तीसगढ़ की भाषा, संस्कृति और परंपरा

छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी लोकसंस्कृति से है। यहां छत्तीसगढ़ी प्रमुख क्षेत्रीय भाषा है। इसके अलावा गोंडी, हल्बी, कुड़ुख, सरगुजिहा, भतरी और अन्य स्थानीय भाषाएं एवं बोलियां प्रचलित हैं।

राज्य की प्रमुख सांस्कृतिक विशेषताएं हैं:

* पंथी नृत्य – सतनामी समाज की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा।

* राउत नाचा – यादव समाज की पारंपरिक लोकनृत्य शैली।

* सुआ नृत्य – महिलाओं द्वारा किया जाने वाला पारंपरिक नृत्य।

* करमा नृत्य – आदिवासी संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा।

* पंडवानी – महाभारत की कथाओं पर आधारित विश्वविख्यात लोकगायन शैली।

* भरथरी गायन – लोकगाथाओं की समृद्ध परंपरा।

हरेली, तीजा, पोला, छेरछेरा, बस्तर दशहरा, मड़ई और गौरा-गौरी जैसे पर्व यहां की सामाजिक एकता और परंपरा के प्रतीक हैं।

 

![छत्तीसगढ़: 77 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा संपन्न

संस्कृति और विरासत के लिए जानी जाती हैं बस्तर –

मध्य प्रदेश से अलग होने के बाद छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा

राज्य निर्माण के समय छत्तीसगढ़ के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी सीमित संसाधनों के बीच एक नई प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करना और पिछड़े क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा में लाना। पिछले 26 वर्षों में विभिन्न सरकारों ने अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया।

(क) सड़क एवं परिवहन

राज्य गठन के बाद राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य मार्गों और ग्रामीण सड़कों का विस्तार हुआ। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से दूरस्थ गांवों को सड़क संपर्क से जोड़ने का प्रयास किया गया। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर, अंबिकापुर और कोरबा जैसे शहरों के बीच संपर्क बेहतर हुआ।

रेलवे नेटवर्क के विस्तार, रेल लाइनों के दोहरीकरण, विद्युतीकरण और स्टेशनों के आधुनिकीकरण से परिवहन क्षमता बढ़ी। रायपुर और बिलासपुर प्रमुख रेल केंद्र के रूप में विकसित हुए।

(ख) बिजली एवं औद्योगिक विकास

छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख बिजली उत्पादक राज्यों में शामिल है। कोरबा, रायगढ़, जांजगीर-चांपा और अन्य क्षेत्रों में बिजली उत्पादन एवं औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार हुआ।

भिलाई इस्पात संयंत्र, बालको, एनटीपीसी, एसईसीएल और अन्य सार्वजनिक एवं निजी औद्योगिक संस्थानों ने राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार में योगदान दिया।

(ग) कृषि एवं किसानों का विकास

छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है। राज्य में धान उत्पादन, समर्थन मूल्य पर खरीदी, सिंचाई सुविधाओं, कृषि उपकरणों और किसान सहायता योजनाओं का विस्तार हुआ।

राज्य गठन के बाद किसानों को धान खरीदी की संस्थागत व्यवस्था का लाभ मिला। बाद के वर्षों में कृषि ऋण, सिंचाई, फसल विविधीकरण, लघु वनोपज और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की योजनाएं भी संचालित हुईं।

(घ) शिक्षा का विस्तार

राज्य में प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों की संख्या बढ़ी। उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, पॉलिटेक्निक और तकनीकी संस्थान स्थापित किए गए।

आईआईटी भिलाई, एम्स रायपुर, आईआईएम रायपुर और हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों ने राज्य को राष्ट्रीय शैक्षणिक पहचान दिलाई। स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना और पीएम श्री विद्यालयों के माध्यम से आधुनिक शिक्षा सुविधाओं का विस्तार हुआ।

(ङ) स्वास्थ्य सुविधाएं

एम्स रायपुर, मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया गया। ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना सरकारों की प्राथमिकता रही है।

महतारी स्वास्थ्य, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, आयुष्मान भारत और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं से आम नागरिकों को लाभ पहुंचाने के प्रयास हुए।

(च) नगरीय एवं ग्रामीण विकास

रायपुर, नया रायपुर (अटल नगर), बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, कोरबा और अन्य शहरों में सड़क, पेयजल, सीवरेज, आवास, स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार हुआ।

नवा रायपुर अटल नगर का विकास आधुनिक नियोजित राजधानी के रूप में राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।

(छ) आदिवासी एवं वनांचल विकास

बस्तर, सरगुजा और अन्य जनजातीय क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, मोबाइल नेटवर्क और रोजगार की सुविधाएं बढ़ाने के प्रयास हुए। वन अधिकार कानून, वन धन केंद्र, तेंदूपत्ता संग्रहण और लघु वनोपज के माध्यम से आदिवासी परिवारों की आजीविका को मजबूत करने की पहल की गई।

(ज) महिला एवं सामाजिक कल्याण

महिलाओं के स्व-सहायता समूहों, पोषण कार्यक्रमों, छात्रवृत्ति, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और आवास योजनाओं का विस्तार हुआ। विभिन्न सरकारों ने अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार महिला सशक्तीकरण और गरीब परिवारों की सहायता के लिए योजनाएं शुरू कीं।

छत्तीसगढ़ के अब तक के सभी मुख्यमंत्री एवं उनका कार्यकाल

1 नवंबर 2000 को राज्य गठन के बाद अब तक छत्तीसगढ़ में चार मुख्यमंत्री बने हैं। इनमें अजीत जोगी राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री और विष्णुदेव साय वर्तमान मुख्यमंत्री हैं।

| क्रम | मुख्यमंत्री | कार्यकाल |
| —- | ————- | ——————————- |
| 1 | अजीत जोगी | 1 नवंबर 2000 – 7 दिसंबर 2003 |
| 2 | डॉ. रमन सिंह | 7 दिसंबर 2003 – 17 दिसंबर 2018 |
| 3 | भूपेश बघेल | 17 दिसंबर 2018 – 13 दिसंबर 2023 |
| 4 | विष्णुदेव साय | 13 दिसंबर 2023 – वर्तमान |

मुख्यमंत्रियों का परिचय और प्रमुख कार्य

1\. अजीत जोगी (2000–2003)

अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री बने। वे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रह चुके थे और बाद में राजनीति में आए। उनके सामने नवगठित राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था खड़ी करने, राजधानी एवं सरकारी संस्थानों की स्थापना, बजट और विकास योजनाओं को व्यवस्थित करने की बड़ी जिम्मेदारी थी। उन्होंने राज्य के शुरुआती प्रशासनिक ढांचे को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

2\. डॉ. रमन सिंह (2003–2018)

डॉ. रमन सिंह छत्तीसगढ़ के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। उन्होंने लगातार तीन विधानसभा चुनावों के बाद सरकार का नेतृत्व किया।

उनके कार्यकाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सड़क निर्माण, ग्रामीण विकास, खाद्यान्न वितरण, बिजली उत्पादन और औद्योगिक विकास पर विशेष जोर दिया गया। बस्तर और अन्य आदिवासी क्षेत्रों में विकास योजनाओं के साथ नक्सलवाद की चुनौती भी उनके शासनकाल का प्रमुख विषय रही।

3\. भूपेश बघेल (2018–2023)

भूपेश बघेल ने दिसंबर 2018 में मुख्यमंत्री पद संभाला। उनके कार्यकाल में किसान हित, धान खरीदी, कृषि ऋण माफी, गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, नरवा-गरवा-घुरवा-बाड़ी और छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया।

उनके शासनकाल में राम वन गमन पथ, छत्तीसगढ़ी पर्वों के आयोजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की पहल भी चर्चा में रही।

4\. विष्णुदेव साय (13 दिसंबर 2023 से वर्तमान)

विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ के चौथे मुख्यमंत्री हैं। वे राज्य के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

उनकी सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना, कृषक सहायता, धान खरीदी, आदिवासी कल्याण, सड़क एवं रेलवे विकास और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को प्राथमिकता दी है।

वर्तमान में राज्य सरकार का लक्ष्य विकसित छत्तीसगढ़ के साथ-साथ जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और रोजगार के अवसरों का विस्तार करना है।

छत्तीसगढ़ के अब तक के सभी राज्यपाल एवं उनका कार्यकाल

राज्यपाल राज्य के संवैधानिक प्रमुख होते हैं। मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद राज्य की निर्वाचित सरकार के रूप में शासन चलाते हैं, जबकि राज्यपाल संविधान के अनुसार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं।

1 नवंबर 2000 से अब तक छत्तीसगढ़ में निम्नलिखित राज्यपाल नियुक्त हुए हैं।

| क्रम | राज्यपाल | कार्यकाल |
| —- | ——————————- | —————————– |
| 1 | दिनेश नंदन सहाय | 30 दिसंबर 2000 – 2 जून 2003 |
| 2 | लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ | 2 जून 2003 – 25 जनवरी 2007 |
| 3 | ई.एस.एल. नरसिम्हन | 25 जनवरी 2007 – 23 जनवरी 2010 |
| 4 | शेखर दत्त | 23 जनवरी 2010 – 2 जुलाई 2014 |
| 5 | राम नरेश यादव (कार्यवाहक) | 2 जुलाई 2014 – 25 जुलाई 2014 |
| 6 | बलरामजी दास टंडन | 25 जुलाई 2014 – 14 अगस्त 2018 |
| 7 | आनंदीबेन पटेल (अतिरिक्त प्रभार) | 15 अगस्त 2018 – 29 जुलाई 2019 |
| 8 | अनुसुईया उइके | 29 जुलाई 2019 – 22 फरवरी 2023 |
| 9 | विश्वभूषण हरिचंदन | 23 फरवरी 2023 – 30 जुलाई 2024 |
| 10 | रमेन डेका | 31 जुलाई 2024 – वर्तमान |

विशेष जानकारी: लेफ्टिनेंट जनरल के.एम. सेठ के कार्यकाल के दौरान 28 जुलाई 2005 से 2 अक्टूबर 2005 तक तत्कालीन महाराष्ट्र के राज्यपाल सुशील कुमार शिंदे ने छत्तीसगढ़ का अतिरिक्त प्रभार संभाला था। इसी प्रकार आनंदीबेन पटेल ने भी छत्तीसगढ़ का अतिरिक्त प्रभार संभाला था।

वर्तमान में रमेन डेका छत्तीसगढ़ के राज्यपाल हैं।

राज्य गठन के बाद महत्वपूर्ण संस्थानों की स्थापना

छत्तीसगढ़ के विकास में राज्य गठन के बाद स्थापित प्रमुख संस्थानों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

* छत्तीसगढ़ विधानसभा: राज्य की विधायी व्यवस्था का प्रमुख केंद्र।

* छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय: 1 नवंबर 2000 को बिलासपुर में स्थापित हुआ। यह देश का 19वां उच्च न्यायालय बना।

* नवा रायपुर अटल नगर: आधुनिक नियोजित राजधानी के रूप में विकसित किया गया।

* एम्स रायपुर: चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण संस्थान।

* आईआईटी भिलाई: तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र।

* आईआईएम रायपुर: प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण संस्थान।

* हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय: विधि शिक्षा और शोध का प्रमुख संस्थान।

* मेडिकल कॉलेजों का विस्तार: रायपुर, बिलासपुर, जगदलपुर, अंबिकापुर, राजनांदगांव, कोरबा सहित विभिन्न क्षेत्रों में चिकित्सा शिक्षा की सुविधाएं विकसित हुईं।

छत्तीसगढ़ की उपलब्धियां और वर्तमान चुनौतियां

आज छत्तीसगढ़ की पहचान केवल धान उत्पादन या खनिज संपदा तक सीमित नहीं है। राज्य ऊर्जा उत्पादन, इस्पात उद्योग, सीमेंट, कृषि, वन उत्पाद, पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुका है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) वर्तमान कीमतों पर लगभग 6.35 लाख करोड़ रुपये अनुमानित किया गया था। यह राज्य की बढ़ती आर्थिक गतिविधियों का संकेत है।

इसके बावजूद राज्य के सामने कई चुनौतियां हैं:

* बस्तर और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करना।

* आदिवासी एवं दूरस्थ गांवों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना।

* स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर देना।

* खनन और औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण एवं जल स्रोतों की रक्षा करना।

* विस्थापित परिवारों को उचित पुनर्वास और मुआवजा दिलाना।

* किसानों की आय बढ़ाना तथा कृषि को आधुनिक और लाभकारी बनाना।

* शहरों में यातायात, जल निकासी, पेयजल और स्वच्छता की समस्याओं का समाधान करना।

विकास का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा, जब राज्य की खनिज संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त समृद्धि का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

छत्तीसगढ़ के भविष्य का सपना : विकसित, समृद्ध और खुशहाल राज्य

छत्तीसगढ़ के निर्माण के पीछे जो सपना था, वह केवल एक नया राज्य बनाने का नहीं था। सपना था कि यहां के लोगों को अपनी पहचान मिले, स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले, किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, आदिवासी समाज को सम्मान और अधिकार मिले तथा हर गांव तक विकास पहुंचे।

आज छत्तीसगढ़ के सामने विकसित राज्य बनने का अवसर है।

इसके लिए कुछ प्रमुख संकल्प आवश्यक हैं:

* प्रत्येक गांव तक सड़क, बिजली, स्वच्छ पेयजल और इंटरनेट की सुविधा।

* किसानों के लिए सिंचाई, आधुनिक तकनीक और कृषि आधारित उद्योग।

* युवाओं के लिए तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और स्थानीय रोजगार।

* महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुरक्षा।

* बस्तर एवं सरगुजा में पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य का विस्तार।

* प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदार और संतुलित उपयोग।

* भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और प्रशासन में पारदर्शिता।

* लोकभाषा, लोककला, लोकसंस्कृति और आदिवासी परंपराओं का संरक्षण।

छत्तीसगढ़ के पास देश की ऊर्जा जरूरतों में योगदान देने की क्षमता है। यहां कृषि, उद्योग, वन संपदा, पर्यटन और मानव संसाधन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

 26 वर्षों का सफर और छत्तीसगढ़ की गौरवशाली पहचान

 

1 नवंबर 2000 को जिस छत्तीसगढ़ ने एक नए राज्य के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी, वह आज 26 वर्षों का सफर तय कर चुका है।

इन वर्षों में चार मुख्यमंत्रियों और दस राज्यपालों के कार्यकाल में राज्य की प्रशासनिक, राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था ने कई महत्वपूर्ण पड़ाव पार किए हैं। अलग-अलग सरकारों ने अपनी नीतियों और प्राथमिकताओं के अनुसार राज्य के विकास में योगदान दिया है।

अजीत जोगी ने नवगठित राज्य की नींव रखी। डॉ. रमन सिंह के लंबे कार्यकाल में बुनियादी ढांचे, खाद्य सुरक्षा और विकास योजनाओं का विस्तार हुआ। भूपेश बघेल के कार्यकाल में किसान कल्याण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और छत्तीसगढ़ी संस्कृति पर विशेष जोर रहा। वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य आदिवासी कल्याण, बुनियादी ढांचे, कृषि और औद्योगिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

राज्य निर्माण के स्वप्नदृष्टाओं ने जिस छत्तीसगढ़ की कल्पना की थी, उसका वास्तविक मूल्यांकन तभी होगा जब यहां के गरीब, किसान, मजदूर, आदिवासी, महिलाएं, युवा और आम नागरिक विकास के लाभार्थी बनेंगे।

छत्तीसगढ़ की असली ताकत यहां के लोग, उनकी मेहनत, उनकी संस्कृति और उनकी एकजुटता है।

आइए, स्थापना दिवस पर संकल्प लें कि हम ऐसा छत्तीसगढ़ बनाएंगे, जहां विकास के साथ प्रकृति सुरक्षित रहे, उद्योगों के साथ रोजगार बढ़े, किसानों के साथ मजदूर खुशहाल हों और आधुनिकता के साथ हमारी सांस्कृतिक पहचान भी जीवित रहे।

जय जोहार, जय छत्तीसगढ़!

नोट: यह विवरण 1 नवंबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। कार्यकाल में अतिरिक्त प्रभार और कार्यवाहक नियुक्तियों को अलग से दर्शाया गया है।

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