दीपावली पर जब लोग परिवार के साथ त्योहार की खुशियां मनाने में व्यस्त थे, तब कुछ सेवाभावी लोग बेजुबान गौमाता की सेवा में जुटे रहे। जनसहयोग से संचालित गौशालाओं को आर्थिक और सामाजिक सहयोग की दरकार।
कोरबा (ट्रैक सिटी)। दीपावली का पर्व खुशियों, रोशनी, प्रेम और आपसी सद्भाव का प्रतीक है। इस दिन हर कोई अपने घर-परिवार के साथ त्योहार मनाने, घरों को दीपों से सजाने और खुशियां बांटने में व्यस्त रहता है। लेकिन समाज में कुछ ऐसे सेवाभावी लोग भी हैं, जिनके लिए सेवा ही सबसे बड़ा उत्सव है। जब पूरा शहर दीपावली की खुशियों में सराबोर रहता है, तब भी ये लोग दिन-रात बेजुबान पशुओं की सेवा और उनकी देखभाल में जुटे रहते हैं।
ऐसा ही सेवाभाव कोरबा के राताखार बायपास रोड पर स्थित **जय मां सर्वमंगला गौ सेवाधाम** में देखने को मिला। यहां दीपावली के पावन अवसर पर गौशाला परिसर को दीपों से रोशन किया गया। गौमाता का पूजन-अर्चन कर दीपावली का पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गौमाता के प्रति सम्मान, सेवा और संरक्षण का संदेश दिया गया। गौशाला परिसर में दीप प्रज्ज्वलित कर सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की गई।
हालांकि दीपावली का यह दृश्य केवल रोशनी और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे उन लोगों का समर्पण भी है, जो बेजुबान पशुओं की देखभाल को अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। गौशाला में रहने वाली गायों के लिए नियमित चारा, पानी, उपचार और साफ-सफाई की व्यवस्था करना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए प्रतिदिन समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की आवश्यकता होती है।

सरकार की ओर से कुछ गौशालाओं के संचालन के लिए सहयोग और अनुदान उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन जिले में ऐसी भी अनेक गौशालाएं हैं, जिनका संचालन समाजसेवियों और आम नागरिकों के छोटे-बड़े सहयोग से किया जा रहा है। इन गौशालाओं के संचालक अपने स्तर पर संसाधन जुटाकर गौमाता की सेवा में लगे हुए हैं। कई बार आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद वे इस सेवा कार्य को जारी रखते हैं।

विडंबना यह है कि गौसेवा की बात तो हर कोई करता है, लेकिन वास्तव में जरूरत के समय सहयोग के लिए आगे आने वाले लोगों की संख्या अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है। जनसहयोग से संचालित गौशालाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती गायों के लिए नियमित चारे और उपचार की व्यवस्था बनाए रखना है। ऐसे में समाज के सक्षम लोगों, व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और युवाओं को आगे आकर इन गौशालाओं की मदद करनी चाहिए।
सहयोग के लिए जरूरी नहीं कि कोई बड़ी आर्थिक राशि ही दी जाए। कोई व्यक्ति हरे चारे की व्यवस्था कर सकता है, कोई पशु आहार उपलब्ध करा सकता है, कोई बीमार गायों के उपचार में मदद कर सकता है, तो कोई अपनी सामर्थ्य के अनुसार आर्थिक सहयोग दे सकता है। छोटे-छोटे प्रयास मिलकर भी गौशालाओं के संचालन में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
दीपावली हमें अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देती है। ऐसे में इस पर्व की सार्थकता तभी और बढ़ जाती है, जब हम अपनी खुशियों में उन बेजुबान जीवों को भी शामिल करें, जो अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते। गौमाता की सेवा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।
जय मां सर्वमंगला गौ सेवाधाम में मनाई गई दीपावली समाज को यही संदेश देती है कि त्योहार की असली खुशी केवल अपने घर को रोशन करने में नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद के जीवन में खुशियों का उजाला लाने में है। जरूरत है कि जनसहयोग से संचालित ऐसी गौशालाओं के प्रति समाज अपनी जिम्मेदारी समझे और मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाए, ताकि गौसेवा का यह पुनीत कार्य निरंतर चलता रहे।

