गिरदावरी 100 प्रतिशत पूरी होने के दावे पर पटवारी संघ के सवाल, पीएफ और डीसीएस प्रणाली को लेकर जताई चिंता
धान खरीदी से पहले गिरदावरी के आंकड़ों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग
कोरबा (ट्रैक सिटी)। छत्तीसगढ़ में फसल गिरदावरी की प्रक्रिया, पीएफ प्रणाली के माध्यम से कराए जा रहे सर्वे और आगामी धान खरीदी को लेकर राजस्व पटवारी संघ ने सवाल उठाए हैं। पटवारी संवर्ग की चार सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर कोरबा में पटवारियों ने रैली निकालकर शासन का ध्यान आकृष्ट कराया। आईटीआई चौक से शुरू हुई रैली कलेक्ट्रेट गेट पहुंचकर समाप्त हुई। इस दौरान पटवारी हाथों में मांगों से संबंधित तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े। रैली के बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर लंबित मांगों के निराकरण की मांग की गई।
राजस्व पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष भागवत कश्यप ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि पटवारी 13 तारीख से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन आंदोलन कर रहे हैं। इसके बावजूद शासन की ओर से उनकी समस्याओं पर सार्थक बातचीत नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा पीएफ प्रणाली के माध्यम से गिरदावरी का काम कराए जाने और उसके आधार पर कार्य की प्रगति के दावे किए जा रहे हैं, जबकि पटवारियों के अनुसार इस प्रक्रिया में कई व्यावहारिक और तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं।
संघ ने वेतन विसंगति, पदोन्नति, फसल गिरदावरी की प्रणाली में बदलाव और आंदोलन के दौरान की गई कार्रवाई को निरस्त करने सहित चार प्रमुख मांगें रखी हैं। पटवारियों का कहना है कि उनकी आपत्तियों को सुने बिना गिरदावरी की प्रक्रिया को पूर्ण मानना उचित नहीं होगा। उनका यह भी कहना है कि धान खरीदी का समय नजदीक होने के कारण फसल, रकबे और गिरदावरी से संबंधित आंकड़ों की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है, ताकि किसानों को आगे किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
13 तारीख से अनिश्चितकालीन आंदोलन, काले कपड़े पहनकर जताया विरोध
राजस्व पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष भागवत कश्यप के अनुसार, पटवारी 13 तारीख से अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान शासन की ओर से उनकी मांगों पर चर्चा करने की पहल नहीं की गई। इसी के विरोध में प्रदेशभर के पटवारियों से काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन करने और अपने-अपने जिलों में कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने का आह्वान किया गया।
कोरबा में भी पटवारियों ने रैली निकालकर अपनी मांगें रखीं। संघ का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य शासन तक अपनी समस्याएं पहुंचाना और लंबित मांगों का निराकरण कराना है। पटवारियों ने स्पष्ट किया कि वे गिरदावरी और राजस्व संबंधी कार्यों के महत्व को समझते हैं, लेकिन काम कराने की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें तकनीकी समस्याओं और मैदानी परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए।
प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि पीएफ प्रणाली का विरोध करने के कारण कुछ पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उनके मुताबिक, कोरबा जिले के पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष मिश्रा को कलेक्टर की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। संघ ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए आंदोलन के दौरान जारी निलंबन, स्थानांतरण और कारण बताओ नोटिस संबंधी आदेशों को निरस्त करने की मांग की है। हालांकि, संबंधित कार्रवाई के कारणों और प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद ही इस मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
गिरदावरी 80 से 90 प्रतिशत पूरी होने के दावे पर सवाल
गिरदावरी कार्य की प्रगति को लेकर पटवारी संघ ने विशेष चिंता जताई है। प्रदेश अध्यक्ष भागवत कश्यप ने मीडिया से चर्चा के दौरान गिरदावरी का काम 80 से 90 प्रतिशत पूरा होने के दावे पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि पीएफ प्रणाली के माध्यम से दर्ज की गई जानकारी और डीसीएस प्रणाली के अंतर्गत पूरी की जाने वाली प्रक्रिया को एक समान मानकर गिरदावरी की प्रगति का आकलन नहीं किया जाना चाहिए।
कश्यप ने अपने बयान में दावा किया कि प्रदेश के लगभग 50 प्रतिशत क्षेत्र में डीसीएस की प्रक्रिया पूरी हुई है, जबकि शेष क्षेत्रों में पीएफ प्रणाली के माध्यम से काम कराया जा रहा है। उनके अनुसार, दोनों प्रणालियों के अंतर्गत हुए कार्य की वास्तविक स्थिति स्पष्ट किए बिना गिरदावरी के 80 से 90 प्रतिशत या शत-प्रतिशत पूरा होने के दावे पर भरोसा करना मुश्किल है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब 13 तारीख को पटवारियों को काम सौंपा गया था, उस समय प्रदेश में लगभग 30 लाख खसरों का उल्लेख किया गया था। इसके बाद आंकड़ों में कमी आने की बात सामने आई है। उन्होंने इसे आंकड़ों की स्थिति से जुड़ा सवाल बताते हुए शासन से स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।
पटवारी संघ का कहना है कि गिरदावरी की प्रगति का आकलन केवल दर्ज की गई प्रविष्टियों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि फसल और रकबे से संबंधित जानकारी किस प्रक्रिया के तहत दर्ज की गई है और उसका सत्यापन किस प्रकार किया जा रहा है। हालांकि, खसरों की वास्तविक संख्या, दोनों प्रणालियों के अंतर्गत पूरे हुए कार्य और गिरदावरी की आधिकारिक प्रगति की पुष्टि संबंधित विभाग से होना बाकी है।
पीएफ प्रणाली की कार्यप्रणाली और सर्वे की सटीकता पर आपत्ति
प्रदेश अध्यक्ष भागवत कश्यप ने पीएफ प्रणाली के माध्यम से गिरदावरी का काम कराए जाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सर्वेयरों की कार्यप्रणाली और तकनीकी व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि गिरदावरी के दौरान खेत, खसरा, फसल और रकबे से संबंधित जानकारी सही तरीके से दर्ज होना आवश्यक है। यदि इस प्रक्रिया में त्रुटि होती है, तो आगे चलकर किसानों के रिकॉर्ड और फसल संबंधी आंकड़ों पर असर पड़ सकता है।
कश्यप ने उदाहरण देते हुए दावा किया कि कवर्धा क्षेत्र में एक ही खेत से संबंधित 17 खसरों पर पीएफ के माध्यम से जानकारी दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। उन्होंने जांजगीर-चाँपा क्षेत्र का भी उल्लेख करते हुए फसल की स्थिति दर्ज करने में संभावित विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उनके अनुसार, ऐसे मामलों की जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सर्वे के दौरान दर्ज की गई जानकारी वास्तविक स्थिति से मेल खाती है या नहीं।
पटवारी संघ का कहना है कि नई तकनीकी प्रणाली से काम कराने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके लिए मैदानी स्तर पर आने वाली समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। संघ ने मांग की है कि सर्वे की प्रक्रिया, आंकड़ों के सत्यापन और फसल की स्थिति दर्ज करने की व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित राजस्व अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि पीएफ प्रणाली के माध्यम से दर्ज की गई जानकारी में वास्तव में किस प्रकार की समस्याएं आ रही हैं और उनके समाधान के लिए विभाग ने क्या व्यवस्था की है।
मोबाइल नंबर से लॉगिन की व्यवस्था पर भी चिंता
पटवारी संघ ने पीएफ प्रणाली की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। प्रदेश अध्यक्ष के बयान के अनुसार, पटवारी के नाम पर पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से पीएफ एप डाउनलोड कर लॉगिन करने की प्रक्रिया को लेकर आशंकाएं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी अन्य व्यक्ति को इस प्रक्रिया के माध्यम से लॉगिन करने की सुविधा मिल जाती है, तो गिरदावरी से संबंधित जानकारी की सुरक्षा और विश्वसनीयता कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
संघ ने आशंका जताई कि यदि लॉगिन और सत्यापन की व्यवस्था पर्याप्त रूप से सुरक्षित नहीं है, तो किसानों की फसल, रकबे और खसरों से संबंधित जानकारी में अनधिकृत बदलाव की संभावना पैदा हो सकती है। इसी आधार पर उन्होंने तकनीकी व्यवस्था की जांच कराने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि एप में लॉगिन करने के लिए किन शर्तों और सत्यापन प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी है।
हालांकि, किसी अन्य व्यक्ति के लिए पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से लॉगिन करना वास्तव में संभव है या नहीं, इसकी स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस आशंका को प्रमाणित तकनीकी खामी के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। संबंधित विभाग की ओर से लॉगिन प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी सामने आने के बाद ही इस सवाल का स्पष्ट उत्तर मिल सकेगा।
धान खरीदी से पहले आंकड़ों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग
गिरदावरी की प्रक्रिया को लेकर पटवारी संघ की चिंता का एक प्रमुख कारण आगामी धान खरीदी भी है। प्रदेश अध्यक्ष भागवत कश्यप ने कहा कि फसल गिरदावरी से संबंधित जानकारी किसानों की कृषि भूमि, फसल और रकबे के रिकॉर्ड के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि अलग-अलग प्रणालियों के अंतर्गत दर्ज आंकड़ों में अंतर रहता है या आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो आगे की प्रक्रिया में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
संघ ने सवाल उठाया है कि धान खरीदी के दौरान गिरदावरी के किस रिकॉर्ड को मान्य आधार बनाया जाएगा। क्या पीएफ प्रणाली के माध्यम से दर्ज की गई जानकारी के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी होगी या इसके लिए डीसीएस प्रणाली के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रिया का पूरा होना भी आवश्यक होगा? पटवारियों का कहना है कि शासन को धान खरीदी शुरू होने से पहले इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।
संघ के मुताबिक, किसानों की फसल और रकबे से संबंधित जानकारी में किसी भी प्रकार की विसंगति होने पर उन्हें रिकॉर्ड में सुधार कराने या संबंधित प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी हो सकती है। इसलिए गिरदावरी की वास्तविक प्रगति और आंकड़ों की स्थिति को स्पष्ट करना जरूरी है।
हालांकि, पीएफ और डीसीएस प्रणाली के अंतर्गत दर्ज जानकारी का धान खरीदी में किस प्रकार उपयोग किया जाएगा और किसी प्रक्रिया के अधूरे रहने से खरीदी पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह संबंधित सरकारी नियमों और दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगा। इस संबंध में विभाग की आधिकारिक स्थिति सामने आना आवश्यक है। फिलहाल पटवारी संघ ने इन आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए समय रहते व्यवस्था स्पष्ट करने की मांग की है।
चार सूत्रीय मांगों में पदोन्नति और वेतन विसंगति का मुद्दा भी शामिल
राजस्व पटवारी संघ ने गिरदावरी से जुड़े सवालों के साथ अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर भी शासन से कार्रवाई की अपील की है। संघ की प्रमुख मांगों में पटवारी संवर्ग से राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति की लंबित प्रक्रिया शुरू करना शामिल है। पटवारियों का कहना है कि पदोन्नति से संबंधित मामलों का निराकरण लंबे समय से लंबित है, इसलिए इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
दूसरी प्रमुख मांग वर्ष 2017 में ग्रेड पे संशोधन से उत्पन्न वेतन विसंगति को दूर करने की है। संघ का कहना है कि वेतन संबंधी विसंगति का निराकरण किया जाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को उनकी मांगों के अनुरूप राहत मिल सके।
तीसरी मांग फसल गिरदावरी के लिए पीएफ प्रणाली के स्थान पर डीएसआर प्रणाली लागू करने की है। संघ का तर्क है कि गिरदावरी की प्रक्रिया में मैदानी परिस्थितियों और व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए, जिससे फसल और रकबे से संबंधित जानकारी की सटीकता सुनिश्चित हो सके।
चौथी मांग आंदोलन के दौरान पटवारियों के विरुद्ध की गई निलंबन, स्थानांतरण और कारण बताओ नोटिस संबंधी कार्रवाई को निरस्त करने की है। संघ का कहना है कि उनकी मांगों और तकनीकी समस्याओं पर बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए।
शासन के रुख पर टिकी नजरें
कोरबा में निकाली गई रैली और प्रदेशभर में काले कपड़े पहनकर किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद अब पटवारी संघ की मांगों पर शासन तथा संबंधित राजस्व विभाग का रुख महत्वपूर्ण हो गया है। एक ओर संघ पीएफ प्रणाली के माध्यम से कराए जा रहे गिरदावरी कार्य की प्रक्रिया और प्रगति पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर पदोन्नति, वेतन विसंगति और आंदोलन के दौरान की गई कार्रवाई को लेकर समाधान चाहता है।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि धान खरीदी से पहले गिरदावरी की वास्तविक प्रगति, पीएफ और डीसीएस प्रणाली के बीच अंतर, आंकड़ों के सत्यापन तथा मोबाइल लॉगिन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट हो। इससे न केवल पटवारियों की आपत्तियों का समाधान करने में मदद मिल सकती है, बल्कि किसानों के रिकॉर्ड और आगामी खरीदी प्रक्रिया को लेकर भी अनावश्यक भ्रम से बचा जा सकता है।
फिलहाल पटवारी संघ ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही है। शासन की ओर से इन मांगों, गिरदावरी के आंकड़ों और तकनीकी व्यवस्था पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

